चीन से मुकाबले के लिए भारत को क्यों है हाई स्पीड ट्रेनों की जरूरत?

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<p style="text-align: justify;">दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था वाला देश भारत आने वाले कुछ सालों में चीन को पछाड़ने का लक्ष्य जरूर बना रहा है, लेकिन भारत को चीन से आगे निकलने और ग्लोबल ग्रोथ का सबसे बड़ा हिस्सा बनने से लिए कई मोर्चों पर चुनौती का सामना करना पड़ेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">वर्तमान में दुनिया की कई कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत की तरफ रुख कर रही है. लेकिन भारत को अगला चीन बनने के लिए अभी काफी लंबा रास्ता तय करना है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">भारत के लिए फिलहाल सबसे ज्यादा जरूरी है कि यह देश अपने बुनियादी ढांचे पर काम करे और उसे दुरुस्त करे. भारत को फिलहाल फास्ट कनेक्टिविटी के लिए हाई स्पीड रेल नेटवर्क को सुधारने पर काम करना चाहिए.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रेल नेटवर्क के मामले में चीन से कितना पीछे भारत&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत फास्ट कनेक्टिविटी के मामले में चीन से कितना पीछे है इसे उदाहरण से समझिए- चेन्नई और बेंगलुरु, आर्थिक गतिविधि के मामले में भारत का दो महत्वपूर्ण शहर हैं. इन दोनों शहरों के बीच 177 मील का फासला हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">अगर किसी व्यक्ति को चेन्नई से बेंगलुरु जाना है तो उन्हें ट्रेन से यात्रा करने में चार घंटे और 20 मिनट लगते हैं. ठीक इतने ही समय में चीन में एक व्यक्ति हाई-स्पीड ट्रेन से बीजिंग से शंघाई तक पहुंच सकता है. जिसकी दूरी 665 मील है जो कि चेन्नई और बेंगलुरु से तीन गुना दूर है. &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दोनों देशों के रेल नेटवर्क के बीच का फर्क समझिए</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रेल की दुनिया ने ही में चीन को शिखर पर पहुंचाया है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन में साल 2008 में सबसे पहले हाई-स्पीड ट्रेनों की शुरुआत की गई थी और आज 15 साल बाद इस देश के पास 2,6000 किमी लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है.</p>
<p style="text-align: justify;">साल 1990 में चीन में रेल की रफ्तार 35-40 किलोमीटर प्रति घंटा ही थी. &nbsp;चीन के रेलवे में ये तेज विकास पिछले 25 साल के निवेश का नतीजा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">वहीं भारत की बात करें तो इस देश में अब यानी साल 2023 में मुंबई से अहमदाबाद के बीच पहली बुलेट ट्रेन परियोजना बन रही है. उम्मीद है कि साल 2026 तक इस परियोजना की शुरुआत होने जाएगी और तब तक चीन का हाई स्पीड रेल नेटवर्क 30,000 मील पहुंच जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत में किसी ट्रेन की रफ्तार सबसे ज्यादा है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">वर्तमान में हमारे देश में सबसे तेज चलने वाली ट्रेन का नाम वंदे भारत है और इसकी रफ्तार 80 मील प्रति घंटा है. हालांकि पूरी रफ्तार से यह ट्रेन बहुत कम ही ट्रैक पर चल पाती है.&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चीन से मुकाबले के लिए ट्रेन कनेक्टिविटी जरूरी क्यों</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारतीय रेलवे हर आम व्यक्ति के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है. भारत में हर दिन हजारों की संख्या में ट्रेनों का संचालन किया जाता है. वहीं ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सिंगापुर में INSTEAD के लिन तियान और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के यूई यू के एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया गया है कि ट्रेन की रफ्तार का एक्सपोर्ट्स से गहरा संबंध है.</p>
<p style="text-align: justify;">आसान भाषा में समझे तो किसी भी देश का रेल नेटवर्क बेहतर होना उस देश में किसी सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की सुगमता को बढ़ाता है और इससे एक्सपोर्ट का बढ़ाने में मदद मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में रेलवे नेटवर्क सुस्त और धीमी रफ्तार में होने के कारण एक्सपोर्ट में भी कम होते हैं. उदाहरण के तौर पर समझे तो भारत का बेंगलुरु शहर सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग का हब है. लेकिन यह हब इसलिए बन पाए क्योंकि इसके लिए किसी तरह का रोड या पोर्ट्स की जरूरत नहीं होती है. लेकिन अगर भारत को &nbsp;गुड्स के एक्सपोर्ट का हब बनना है तो इस देश को बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत पड़ेगी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">वर्तमान में भारत में 34 वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही हैं. जिसकी रफ्तार 180 किमी है लेकिन रेलवे बोर्ड की तरफ से इसे सिर्फ 160 किमी की रफ्तार से चलाने की अनुमति दी गई है. बावजूद इसके कई राज्यों में पटरियों की खराब स्थिति को देखते हुए 160 की रफ्तार से भी धीमा चलाया जाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चीन का रेल नेटवर्क इतना मजबूत कैसे बना&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारतीय रेल को मौजूदा समय में जिस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ठीक उसी तरह चीन में भी पहले से बनी हुई रेल लाइनों पर यात्रियों का बहुत दबाव था और नई तकनीक के मुताबिक ट्रेनों और ट्रैक्स को विकसित करने की जरूरत थी.</p>
<p style="text-align: justify;">इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस देश ने हाई स्पीड रेल का नेटवर्क बनाना शुरु किया. यही कारण है कि चीन ने अंधाधुंध तरीके से लगभग 20,000 किलोमीटर के ‘हाई स्पीड रेल नेटवर्क’ का निर्माण किया गया. इस प्रोजेक्ट पर वर्ल्ड बैंक ने भी पैसा लगाया.</p>
<p style="text-align: justify;">चीन ने अपने ज्यादातर ट्रैक &nbsp;मध्य और पूर्वी चीन में बनाना शुरू किया. पर ऐसी कई जगहों पर भी लाइनें बिछाई गई जहां कम आबादी थी या वह स्थान आबादी वाले इलाके से 100 किलोमीटर की दूरी पर था. उस वक्त उम्मीद की जा रही थी जहां ट्रेन जाएगी वहां नई बसावट बनती जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत में ट्रेन की स्थिति में जान लीजिए&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">15 नवंबर को दो बड़ा ट्रेन हादसा हो गया. कल दिल्ली से सहरसा जा रही 12554 नंबर की वैशाली एक्सप्रेस में आग लग गई. इस घटना में 19 यात्री घायल हो गए. इससे पहले इटावा की ट्रेन में आग लगी थी. &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा पिछले महीने यानी अक्टूबर में एक सप्ताह के भीतर दो बड़े ट्रेन हादसे हुए. 29 अक्टूबर यानी रविवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में दो पैसेंजर ट्रेनों में टक्कर हुई और इस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई, वहीं 50 यात्री घायल हो गए. इस दुर्घटना के दो दिन बाद ही यानी 31 अक्टूबर को झारखंड के हजारीबाग जिला में एक बड़ा रेल हादसा हो गया. इस हादसे में 9 लोग घायल हो गए है जबकि 2 लोगों की मौत हो गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">इन दुर्घटना का कारण ह्यूमन एरर बताया गया. लेकिन ये पहली बार नहीं है जब भारत में ऐसे बड़े रेल हादसे हुए हैं. इस देश का रेल हादसों का इतिहास काफी पुराना रहा है. साल 1999 में पश्चिम बंगाल में दो ट्रेनों की टक्कर में 285 लोगों की मौत हुई थी. वहीं साल 2010 में भी इसी राज्य में 145 लोगों की मौत हुई, जब एक पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतरकर एक मालगाड़ी से टकरा गई थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पिछले एक दशक में कितने ट्रेन हादसे हो चुके हैं&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सरकारी आंकड़ों की मानें तो साल 2014 से लेकर अब तक यानी साल 2023 तक रेलवे में 10 ट्रेन हादसे हो चुके हैं जिसमें लगभग 600 लोगों की मौत हुई. तो वहीं 1300 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">इन 10 रेल हादसों में से 3 हादसे तो <a title="साल 2023" href="https://www.abplive.com/topic/new-year-2023" data-type="interlinkingkeywords">साल 2023</a> में ही हुए हैं. इसी साल के जून महीने में ओडिशा के बालासोर में एक भयंकर ट्रेन हादसा हुआ जो पिछले 15 सालों में हुआ सबसे भयंकर ट्रेन एक्सीडेंट था. जिसमें 291 लोगों की जान चली गई थी और 1000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">अगस्त 2017 में यूपी के मुजफ्फरनगर में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना हुआ इस दुर्घटना में 23 लोगों की जान चली गई थी. नवंबर 2016 में कानपुर के पास इंदौर पटना एक्सप्रेस को दुर्घटना का शिकार होना पड़ा था. जिसमें 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">मार्च 2015 में जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 34 लोग मारे गए. साल 2012 को कोई कैसे भूल सकता है बीबीसी की एक रिपोर्ट की मानें इस साल 14 रेल हादसे हुए. जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">साल 2010 के जुलाई महीने में पश्चिम बंगाल में उत्तर बांगा एक्सप्रेस दुर्घटना का शिकार हुई थी और इसी साल के सितंबर महीने में &nbsp;मध्य प्रदेश में ग्वालियर इंटरसिटी एक्सप्रेस का एक्सीडेंट हुआ था जिस रेल हादसे ने भी कई लोगों की जान ले ली थी.&nbsp;</p>

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