धनी देशों के समूह जी-7 ने मंगलवार को कनाडा के कनानास्किस में संपन्न हुए सम्मेलन में पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए दोबारा से संकल्प लिया। इस दौरान ईरान की कड़ी आलोचना की गई। उसे क्षेत्रीय अस्थिरता तथा आतंकवाद का मुख्य स्रोत बताया गया। वहीं ईरान ने जी-7 के इस रुख की तीव्र आलोचना करते हुए इसे पक्षपातपूर्ण और भड़काऊ बताया।
यह शिखर सम्मेलन तब चर्चा में आ गया जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सम्मेलन को बीच में ही छोड़ दिया और स्वदेश लौट गए। ट्रंप की इस अचानक वापसी के बावजूद, शेष छह नेताओं ने अंतिम दिन कई उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित कर संदेश देने का प्रयास किया कि समूह अब भी वैश्विक मुद्दों पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
इजरायल का समर्थन, ईरान पर हमला
सम्मेलन के दौरान जी-7 नेताओं ने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने गाजा और व्यापक पश्चिम एशिया क्षेत्र में युद्धविराम की आवश्यकता को स्वीकारते हुए ईरान को क्षेत्र में “अस्थिरता और आतंकवाद का मुख्य प्रायोजक” बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बात पर बल दिया कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को तुरंत कम किया जाना चाहिए। उन्होंने साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोकथाम के लिए वार्ताएं दोबारा शुरू करने की अपील की। मैक्रों ने एक संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि हमें मध्य-पूर्व में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देनी चाहिए। ईरान और इजरायल के बीच तनाव पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।
नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष जोर
जी-7 नेताओं ने अपने संयुक्त वक्तव्य में क्षेत्रीय तनाव के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानवाधिकारों का पालन किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया कि हम क्षेत्र में सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे युद्धविराम की ओर कदम बढ़ाएं और आम नागरिकों को हिंसा से बचाएं।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
जी-7 के इस रुख पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाकेई ने कहा कि जी-7 नेताओं ने इजरायल की घोर आक्रामकता और गैरकानूनी हमलों का समर्थन कर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला कर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन किया है। बाकेई ने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, और न ही वह क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण है। वास्तव में इजरायल की नीतियां ही पूरे क्षेत्र को युद्ध की ओर धकेल रही हैं।
ब्रिटेन ने रूस पर लगाए नए प्रतिबंध
सम्मेलन में मध्य-पूर्व के अलावा यूक्रेन संकट पर भी चर्चा हुई। ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की, जिसमें चार व्यक्तियों, छह कंपनियों और 20 जहाजों को निशाना बनाया गया है। इनमें से कई संस्थाएं तेल, मरीन सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति से जुड़ी हैं, जो सीधे रूस के युद्ध प्रयासों को समर्थन देती हैं। ब्रिटेन की सरकारी वेबसाइट पर जारी सूचना के अनुसार, 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से अब तक 2,300 से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों और संस्थानों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
रूस को जी-8 से बाहर करना गलती: ट्रंप
सम्मेलन से इतर, डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान देकर नई बहस छेड़ दी कि 2014 में रूस को जी-8 से बाहर करना एक बड़ी रणनीतिक भूल थी। ट्रंप ने कहा कि अगर रूस को उस समय अलग-थलग न किया गया होता, तो शायद वह 2022 में यूक्रेन पर हमला नहीं करता। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने ट्रंप के इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जी-7 अब रूस के लिए अप्रासंगिक हो चुका है और इसकी भूमिका वैश्विक मंच पर सीमित रह गई है।
रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा
जी-7 सम्मेलन के दौरान नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर भी विचार किया। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं।
सम्मेलन का यह निकला निष्कर्ष
ट्रंप के अचानक लौटने और रूस की तीखी प्रतिक्रियाओं के बावजूद जी-7 के शेष छह देशों ने यह दिखाने की कोशिश की कि वे अभी भी अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व देने की स्थिति में हैं। लेकिन ईरान और रूस जैसे देशों की आलोचनाएं यह भी दर्शाती हैं कि पश्चिमी गठबंधन के निर्णयों को व्यापक वैश्विक समर्थन नहीं मिल रहा है। जैसे-जैसे ईरान-इजरायल और रूस-यूक्रेन संकट गहराता जा रहा है, जी-7 की कूटनीतिक क्षमता और संतुलित वैश्विक दृष्टिकोण की परीक्षा और कठिन होती जा रही है।
