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Titar Singh Story: राजस्थान विधानसभा चुनाव में श्रीगंगानगर जिले की करणपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमा रहे 78 वर्षीय तीतर सिंह सुर्खियों में हैं. तीतर सिंह अब तक 31 बार विभिन्न चुनाव लड़ चुके हैं और सभी में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है. अब वह 32वीं बार चुनाव लड़ रहे हैं. वह जीवनयापन के लिए दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है, जिसमें उन्हें दिन के 255 रुपये मिलते हैं.
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, तीतर सिंह को लोगों का दिल और वोट जीतने का भरोसा है. वह कहते हैं, ”मुझे वोट देना लोगों की पसंद पर निर्भर है. अगर वे मुझे अपने प्रतिनिधि के रूप में देखना चाहते हैं तो वे मुझे वोट देंगे.”
अब तक कई चुनावों में तीतर सिंह जमानत भी नहीं बचा पाए है लेकिन उनका हौसला बरकार है. वह कहते हैं, ”मैं चुनाव लड़ना जारी रखूंगा क्योंकि वे किसी पार्टी या लोगों तक ही सीमित नहीं है. आम लोग भी राजनीति में उतर सकते हैं. मैं गरीबों और गैर-प्रतिनिधित्व वालों के लिए खड़ा हूं.”
MGNREGA से मिलने वाली मजदूरी पर हैं निर्भर
रिपोर्ट के मुताबिक, तीतर सिंह के चुनावी हलफनामे के अनुसार वह करणपुर के गुलाबेवाला गांव के रहने वाले हैं. उनके पास कुल संपत्ति के रूप में 2500 रुपये थे, जिसका इस्तेमाल उन्होंने नामांकन दाखिल करने के लिए किया. वह अपने रुपयों को पत्नी के पास रखते हैं.
तीतर सिंह ने औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की है. वह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) योजना से मिलने वाली मजदूरी पर निर्भर करते हैं. उनके बच्चों की शादी हो चुकी है और वे भी मनरेगा के तहत मजदूरी करते हैं.
‘इसलिए मैंने हर बार लड़ने का फैसला किया’
तीतर सिंह ने कहा, ”कोई भी सरकार गरीबों की दुर्दशा नहीं समझती है. वे हमें और हमारे मुद्दों को हल्के में लेते हैं, इसलिए मैंने हर बार लड़ने का फैसला किया. यह उन सरकारों के लिए एक चुनौती है जो आम लोगों कमतर आंकती हैं.”
उन्होंने कहा, ”हमारे पास कोई जमीन या संपत्ति नहीं है लेकिन हम जीवन चलाने में सक्षम हैं. कई बार जमानत जब्त होने के बावजूद हमें किसी भी वित्तीय समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है.” तीतर सिंह ने अपना पहला चुनाव 1970 में लड़ा था और तब से लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव मिलाकर कई चुनाव लड़ चुके हैं.
बताया चुनाव लड़ते रहने के लिए क्या प्रेरित करता है
चुनाव लड़ते रहने के लिए क्या प्रेरित करता है, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बड़ी पार्टियों की गरीबों के प्रति उदासीनता को देखते हुए वह चुनाव लड़ते हैं. तीतर सिंह ने कहा कि कई ऐसे परिवार है जो दो या तीन पीढ़ियों से बगैर किसी जमीन, संपत्ति या धन के रह रहे हैं. उन्होंने कहा, ”मैं चाहता हूं कि उन्हें जमीन मिले और सरकार हमारी मदद करे.”
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