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मेष-कर्क, सिंह और कन्या राशि पर संकट के बादल, सागर के ज्योतिष से जानें उपाय, दूर हो जाएंगी तकलीफ!

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अनुज गौतम / सागर. राहु केतु ग्रह के राशि परिवर्तन करने की वजह से मेष कर्क सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए इसका खराब प्रभाव पड़ने वाला है. लेकिन कुछ उपाय करने से इस प्रभाव को बहुत ज्यादा हद तक बेअसर भी किया जा सकता है.लाला रामस्वरूप पंचांग के अनुसार राहु मेष राशि से मीन राशि में तथा केतु तुला राशि से कन्या राशि ने गोचर किया है. भारतीय गणना का यह सबसे खराब समय मानते है. इसके अलावा उसी समय काल की चौघड़िया भी है इन दोनों बुराइयों के कारण राहु और केतु के मारक शक्ति में वृद्धि हो जाती हैं. जिसकी वजह से अलग-अलग राशियों पर इसका खराब प्रभाव बताया गया है. जो लोगों के लिए काफी नुकसानदायक है.

सागर के मकरोनिया में आसरा ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषी पंडित अनिल कुमार पांडे बताते हैं कि राहु और केतु दोनों ग्रह एक साथ ही परिवर्तित होते हैं इनका परिवर्तन अलग-अलग पंचांग के हिसाब से अलग-अलग समय से हो रहा है राहु केतु के परिवर्तन से मेष कर्क सिंह और कन्या राशि के जातकों को विशेष रूप से नुकसान होगा. इसलिए इन राशि के जातकों को हो सके तो किसी योग्य ब्राह्मण से खराब प्रभाव से बचने के लिए उनके मंत्रो का जाप करवाए. और इन्हें सतर्क रहने की भी जरूरत है.

राहु और केतु के कष्ट से मुक्ति पाने के उपाय:-

1-किसी योग्य ब्राह्मण से राहु और केतु के खराब प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए राहु और केतु के मंत्रों का जाप करवाए.
2-कुएं के कछुए को लाई खिलाएं.
3-काले कुत्ते को रोटी खिलाएं.
4-भगवान भैरव की आराधना करें.
5-अपनी पुराने कपड़े किसी कोड़ी को पहना दे

 इन राशि के जातकों पर राहु केतु के खराब प्रभाव का असर नहीं पड़ेगा

1. ज्योतिष आचार्य अनिल पांडे के मुताबिक राहु और केतु भौतिक ग्रह नहीं हैं. यह दोनों ग्रह छाया ग्रह हैं. ये सदैव वक्री रहते हैं. इनका एक राशि में भ्रमण काल 18 महीने का है. ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांत पक्ष के अनुसार चंद्रमार्ग उत्तर में रवि मार्ग को जिस बिंदु पर काटता है उसे फलित ज्योतिष में राहु कहते हैं. इसी प्रकार चंद्रमा दक्षिण में रवि मार्ग को जिस विंदु पर काटता है उसे केतु कहते हैं.
2. पुराणों के अनुसार राहु के पिता का नाम विप्रचित और माता का नाम सिंहिका है. समुद्र मंथन के पश्चात अमृत बांटते समय भगवान श्री विष्णु द्वारा राहु का सर सुदर्शन चक्र से काट दिया गया. तब से धड़के ऊपर का भाग राहु और नीचे का भाग केतु के रूप में प्रसिद्ध हो गया.
3. ज्योतिष के अनुसार राहु को काल पुरुष का दुख माना गया है. इसे दुख और शोक का प्रतीक भी माना जाता है. कुछ ज्योतिषाचार्यो द्वारा राहु को कन्या राशि का और केतु को मीन राशि का माना जाता है. राहु उच्च राशि मिथुन और वृष तथा नीच राशि धनु और वृश्चिक है. राहु और केतु दोनों ग्रह शुक्र ,बुद्ध और शनि से मित्र भाव रखते हैं.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Local18

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