5 राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव, बुरे समय से बचाएंगे ये उपाय! ज्योतिषी से जानें सब

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अभिलाष मिश्रा/इंदौर: हर व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कभी न कभी पड़ता ही है. शनि के प्रभाव वाले साढ़े सात साल और ढाई साल का बड़ा महत्व भी है. कई ऐसे लोग हैं, जो इस समय में राजा तो कई रंक भी बन जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि आने वाले काफी समय तक कुंभ राशि में रहने वाले हैं.

इस वजह से कुछ राशियों पर साढ़ेसाती और कुछ पर ढैय्या का प्रभाव पड़ रहा है. कुंडली में शनि की स्थिति के हिसाब से अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव इस दौरान मिलता है. लेकिन, कुछ उपाय ऐसे हैं, जिनके करने से शनि के प्रभाव में कुछ कमी जरूर आ जाती है. इंदौर के प्राचीन शनि मंदिर के मुख्य पुजारी और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य नीलेश तिवारी ने इस पर विस्तार से चर्चा की.

इन राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव
पंडित नीलेश तिवारी बताते हैं कि वर्तमान में मकर, कुंभ और मीन राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है. वहीं कर्क और वृश्चिक राशि पर ढैय्या का प्रभाव है. ढैय्या यानी ढाई साल के लिए इन दोनों राशियों पर शनि की दृष्टि रहेगी. इन सबसे ऊपर व्यक्ति का कर्म प्रभाव और भाग्य प्रभाव होता है. शनि देव क्योंकि कर्म फल के दाता हैं. साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान वह हमारे द्वारा किए गए कर्मों का फल हमें देते हैं. व्यक्ति के जैसे कार्य और विचार होते हैं, उसी प्रकार से उस व्यक्ति को जीवन में फल भी प्राप्त होते हैं. इसलिए व्यक्ति को जीवन में अपने कर्मों पर विचार जरूर करना चाहिए.

उपाय करने से कृपा होगी प्राप्त
जन्म कुंडली के 12 घरों में 4 घरों पर शनि देव का पूर्ण प्रभाव रहता है. सबसे पहले अगर जीवन में शनि देव की प्रतिकूलता ज्यादा है, यानी अगर आपकी राशि में साढ़ेसाती चल रही है तो हम कुछ उपाय शुरू कर सकते हैं. ऊपर बताई गईं पांच राशि के जातक ये उपाय जरूर करें. निश्चित रूप से उन्हें प्रतिकूलता में भी अनुकूलता मिलेगी. साथ ही शनिदेव की विशेष कृपा भी प्राप्त होगी.

स्नान करते समय इस बात का रखें ध्यान
जल में काला तिल, शमी पत्र या फिर गंगाजल या यमुना जल मिलाकर स्नान करने से शनि की दशा में विशेष लाभ होता है. ऐसे व्यक्तियों को स्नान करने के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य जरूर देना चाहिए. सूर्य देवता शनि देव के पिता हैं, इसलिए जैसे हनुमान जी की पूजा आराधना से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है. ठीक उसी तरह सूर्य देवता को अर्घ्य देने से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं.

जरूर जलाएं दीपक
अगर आपके आसपास कोई शनि मंदिर नहीं है तो किसी भी देवालय में जाकर शनि देव के नाम से सरसों का दीया जरूर लगाएं. खासकर पीपल के वृक्ष के नीचे भी सरसों के तेल का दीया जरूर लगाना चाहिए. प्रत्येक दिन शनि देव का स्मरण जरूर करें. शुभ कर्म करें और अतीत में हुए बुरे कर्मों के लिए शनि देव से क्षमा ज़रूर मांगें. संभव हो तो प्रत्येक दिन एक माला जप जरूर करनी चाहिए.

गरीब का न करें अपमान
इसके अलावा किसी वृद्ध, किसी गरीब या कोढ़ से ग्रसित व्यक्ति को दान जरूर करना चाहिए. अपने से श्रेष्ठ व्यक्ति या फिर अपने से निम्न पद पर कार्य कर रहे किसी भी व्यक्ति का अपमान भूल कर भी न करें. क्योंकि शनि देव इससे बेहद नाराज होते हैं. शनि देव के 108 नाम हैं, जो आसानी से आपको धार्मिक पुस्तक में और इंटरनेट पर भी मिल जाएंगे. अगर संभव हो तो उनका नियमित रूप से पाठ करें.

(NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. NEWS18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.)

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