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<p style="text-align: justify;">7 अक्टूबर को शुरू हुआ हमास और इजरायल युद्ध अब काफी भयानक रूप ले चुका है. इस जंग में हर रोज हजारों लोगों की मौत हो रही है. इसी महीने की शुरुआत में यानी 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर अचानक 5 हजार से ज्यादा मिसाइलें छोड़ दी थी. इस हमले में कई मासूम लोगों की जान चली गई थी.<br /><br />जिसके बाद से ही जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल की तरफ से गाजा पट्टी पर हमले किए जा रहे हैं. इस युद्ध को शुरू हुए लगभग 20 दिन होने वाले हैं लेकिन अब तक न इजरायल पीछे हटने को तैयार है न ही हमास. ऐसा लग रहा है कि मानों इजरायल ने हमास को पूरी तरह खत्म करने की ठान ली है.<br /><br />इजरायल चाहता है कि गाजा पट्टी में मौजूद फिलिस्तीनी नागरिक उस इलाके को खाली कर सुरक्षित क्षेत्र में चले जाएं. ताकि इजरायली सैनिक जमीनी जंग की तैयारी कर सके. लेकिन गाजा के मुस्लिम इस वक्त इसी पसोपेश में हैं कि वह यहां से निकलकर कहां शरण लें.<br /><br />इतना तो तय है कि इजरायल में इन मुस्लिम शरणार्थियों को जगह नहीं मिलेगी. लेकिन हैरानी की बात ये है कि गाजा पट्टी के आसपास का कोई मुस्लिम देश भी इन युद्ध पीड़ितों को अप यहां शरण देने के लिए तैयार नहीं हो रहा है. मिस्र और अरब देशों ने भी गाजा के मुस्लिम शरणार्थियों के मामले में हाथ खड़े कर रखे हैं. जॉर्डन में पहले से ही बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी आबादी है.<br /><br /><em>ऐसे में इस रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर मिस्र और जॉर्डन जैसे मुस्लिम देश के लोग भी गाजा की मदद क्यों नहीं कर रहे हैं.</em><br /><br /><strong>सबसे पहले समझिए फिलिस्तीन के कितने हिस्से हैं</strong><br /><br />फिलिस्तीन के तीन हिस्से हैं पहला है वेस्ट बैक, दूसरा हिस्सा है गाजा पट्टी और तीसरा और आखिरी हिस्सा है पूर्वी येरुशलम.<br /><br /><strong>वेस्ट बैंक:</strong> वर्तमान में वेस्ट बैंक को फतह मूवमेंट का फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन और इजरायल मिलकर चलाते हैं. इस क्षेत्र के 40 प्रतिशत हिस्से पर पीएलओ और 60 प्रतिशत हिस्से पर इजरायल का कंट्रोल है. इजरायली अधिकारी वेस्ट बैंक में सुरक्षा की देख-रेख के लिए फिलिस्तीन अथॉरिटी के लिए काम करते हैं. इसका क्षेत्रफल 5,860 वर्ग किलोमीटर है और यहां 30 लाख आबादी रहती है.<br /><br />इसके अंतर्गत पूर्वी येरुशलम भी आता है.पूर्वी यरुशलम पर भी इजरायल का कब्जा है. पूर्वी येरुशलम में ही अल-अक्सा परिसर है, जिसकी ईसाई, मुसलमान और यहूदियों के लिए धार्मिक रूप से काफी महत्व है. इस क्षेत्र का क्षेत्रफल 5,860 वर्ग किलोमीटर है और लगभग 30 लाख आबादी यहां रहती है.<br /><br /><strong>गाजा पट्टी:</strong> गाजा दुनिया का सबसे घनी आबादी वाला इलाका है. यह क्षेत्र एक पट्टी के तौर जाना जाता है. गाजा पट्टी इजरायल के दक्षिण पश्चिम में 45 किलोमीटर लंबा और 6-10 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र है. गाजा पट्टी का इलाका इजरायल, भूमध्य सागर और मित्र से घिरा हुआ है. इस इलाकों पर चरमपंथी समूह हमास का कंट्रोल है, लेकिन इसकी सीमाओं को इजरायल ने ब्लॉक किया हुआ है.<br /><br />इस क्षेत्र में पानी और बिजली के आने जाने पर भी इजरायल के परमिशन की जरूरत होती है. हमास ने 7 अक्टूबर को इसी जगह से इजरायल पर हमला किया था. मुख्य रूप से गाजा पट्टी के पांच प्रांत हैं- दीर अल-बलाह, उत्तरी गाजा, गाजा सिटी, खान यूनिस और राफा.<br /><br />गाजा पट्टी के जमीन पर इसके तीन क्रॉसिंग बॉर्डर हैं, इन तीनों में से दो पर तो इजरायल का ही कंट्रोल है और तीसरी क्रॉसिंग पर मिस्र का कंट्रोल है. मिस्र के कंट्रोल वाला बॉर्डर यानी राफा क्रॉसिंग बॉर्डर इस युद्ध के बाद से ही चर्चाओं का विषय बना हुआ है, क्योंकि फलस्तीनियों के पास फिलहाल गाजा पट्टी से निकलने के लिए यही एकमात्र रास्ता है.<br /><br /><strong>युद्ध पीड़ितों को अपने देश में क्यों नहीं शरण देना चाहते जॉर्डन और मिस्र</strong><br /><br />अभी कुछ दिन पहले ही <span style="text-decoration: underline;">मिस्र</span> के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने इस पूरे युद्ध और मिस्र में शरण नहीं देने के मामले पर अब तक की सबसे सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान युद्ध का उद्देश्य सिर्फ हमास से लड़ना नहीं है, बल्कि नागरिक निवासियों को मिस्र की ओर पलायन करने के लिए मजबूर करने का एक प्रयास भी है." मिस्र के राष्ट्रपति ने इस बयान के साथ इजरायल को चेतावनी भी दे दी कि अगर इजरायल ऐसा ही करता रहा तो इससे क्षेत्र में शांति भंग हो सकती है.<br /><br /><span style="text-decoration: underline;">मिस्र</span> से एक दिन पहले ही जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने इसी तरह का एक संदेश देते हुए कहा था कि वह इस युद्ध के शरणार्थियों को जॉर्डन और मिस्र में नहीं घुसने देंगे. किंग ने कहा था कि मानवीय आधार पर शरणार्थियों को कहीं रखना है तो गाजा या फिर वेस्ट बैंक (फिलिस्तीन) में ही कहीं रखना चाहिए.<br /><br /><strong>मिस्र ने दिया ये तर्क</strong><br /><br />हालांकि मिस्र ने इजराइल पर गाजा में मानवीय सहायता की अनुमति देने के लिए दबाव डाला था, और इजराइल ने बीते बुधवार को कहा था कि वह ऐसा करेगा, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि गाजा में मानवीय सहायता की अनुमति कब और कैसे मिलेगी.<br /><br />संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मिस्र, जो बढ़ते आर्थिक संकट से जूझ रहा है, पहले से ही लगभग 9 मिलियन शरणार्थियों और प्रवासियों की मेजबानी करता है, जिनमें लगभग 300,000 सूडानी शरणार्थी भी शामिल हैं, जो इसी साल अपने देश के युद्ध से भागकर <span style="text-decoration: underline;">मिस्र</span> पहुंचे थे.<br /><br />इसके अलावा अरब देशों और कई फिलिस्तीनियों को इस बात का भी शक है कि इजराइल इस मौके का इस्तेमाल स्थायी रूप से जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए करेगा. वह फिलिस्तीनियों को वहां से हटा के यहूदियों को बसा देगा. अगर ऐसा होता है तो फिलिस्तीनी गाजा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम को अपने लिए एक देश बनाने की जो मांग कर रहे थे वह मांग ही पूरी तरीके से खत्म हो जाएगी. <br /><br />कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में एक वरिष्ठ फेलो एच.ए. हेलियर एसोसिएट ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा कि अगर पहले ही बातचीत करके फिलिस्तीन को एक अलग देश बनाने की मांग पर ध्यान दिया गया होता, तो युद्ध जैसे हालात ही नहीं बनते.'<br /><br />उन्होंने आगे कहा कि सभी ऐतिहासिक मिसालें इस तथ्य की ओर इशारा करती हैं कि जब फिलिस्तीनियों को फिलिस्तीनी क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, तो उन्हें वापस लौटने की अनुमति नहीं दी जाती है." और ऐसे में मिस्र नहीं चाहता की गाजा में फिलिस्तीनियों को सफाया करने का एक भी मौका इजरायल को दिया जा सके.<br /><br /><strong>हमास आतंकवादियों को अपनी धरती पर नहीं लाना चाहता मिस्र</strong><br /><br />इसके अलावा मिस्र का ये भी कहना है कि गाजा से बड़े पैमाने पर पलायन हमास या अन्य फिलिस्तीनी आतंकवादियों को उसकी धरती पर ला सकता है और हमास संगठन के लोग सिनाई में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं. बता दें कि सिनाई वह क्षेत्र है जहां मिस्र की सेना ने सालों तक इस्लामी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. एक समय में हमास पर उनका समर्थन करने का आरोप भी लगाया गया था.<br /><br /><strong>फिलिस्तीन के विस्थापन का है पुराना इतिहास</strong><br /><br />फिलिस्तीनियों के विस्थापन का एक पुराना इतिहास रहा है. साल 1948 में जब इजरायल बना था, उस वक्त भी हुए युद्ध के दौरान लगभग 7 लाख फिलिस्तीनियों ने देश छोड़ दिया था. इन शरणार्थियों को अरबी में इलाके के लोग अरबी में ‘नकबा’ या तबाही कहते हैं.<br /><br />इसके बाद साल 1967 में मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से हुए युद्ध में इजरायल ने वेस्ट बैंक पर कब्जा कर लिया. इस युद्ध में लगभग 3 लाख से ज्यादा फिलिस्तीनी वहां से विस्थापित हुए, इन शरणार्थियों में से ज्यादातर लोग जॉर्डन पहुंचे थे और वहीं शरण ली थी.<br /><br />वर्तमान में 6 मिलियन से ज्यादा शरणार्थी और उनके वंशज वेस्ट बैंक, गाजा, लेबनान, सीरिया और जॉर्डन के शिविरों और समुदायों में रहते हैं. कई शरणार्थी तो खाड़ी अरब देशों या पश्चिम में अपना जीवन बसर कर रहे हैं.<br /><br />इसके अलावा लगभग 3.1 मिलियन फिलिस्तीन शरणार्थी यूएनआरडब्ल्यूए द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं. वहीं, एजेंसी के स्कूल हर साल 526,000 छात्रों को शिक्षित करते हैं, जिनमें से आधी महिलाएं हैं. फिलिस्तीनी शरणार्थियों की राहत और मानव विकास का समर्थन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिसंबर 1949 में एजेंसी बनाई गई थी. यूएनआरडब्ल्यूए की "शरणार्थी" की परिभाषा में वे फिलिस्तीनी शामिल हैं जो 1948 के युद्ध के दौरान भाग गए थे या अपने घरों से निकाल दिए गए थे.<br /><br /><strong>इजरायल के कब्जे वाले हिस्से में कितने फलस्तीनी</strong><br /><br />पैलेस्टीनियन सेंट्रल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स के एक आंकड़े के मुताबिक वर्तमान में वेस्ट बैंक में कुल 20 लाख फलस्तीनी रहते हैं. इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर इजरायल का भी कब्जा है. साल 2017 तक वेस्ट बैंक में 809,738 फलस्तीनी शरणार्थी के तौर पर पंजीकृत थे. गाजा में 2018 तक 1,386,455 फलस्तीनी शरणार्थी के तौर पर रजिस्टर्ड थे.<br /><br />साल 2018 में आई येरुशलम इसंटीट्यूट फॉर इजरायल स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार, 1967 के बाद से येरुशलम में फिलस्तीनियों की संख्या में 25 प्रतिशत की बढ़त हुई है. यहां की कुल आबादी का 21 फीसदी हिस्सा फलस्तीनियों का है.<br /><br /><strong>कब और क्यों हुई इस जंग की शुरुआत</strong><br /><br />7 अक्टूबर की सुबह इजरायल पर फिलिस्तीन संगठन हमास ने महज 20 मिनट में 5 हजार रॉकेट दागे. ये रॉकेट इजरायल के रिहायशी इमारतों पर गिरे जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई. इस हमले को हमास ने ऑपरेशन ‘अल-अक्सा फ्लड’ का नाम दिया.<br /><br />इजरायल पर हुए हमले के तुरंत बाद ही इस देश ने ‘युद्ध’ की घोषणा कर दी गई और जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने गाजा पट्टी में हमास के 17 सैन्य ठिकानों और 4 हेडक्वार्टर पर हवाई हमला किया. इस हमले में भी कई लोगों की मौत हुई.<br /><br />इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उसी दिन युद्ध की घोषणा करते हुए कहा कि फिलिस्तीन अपने दुश्मन से "अभूतपूर्व कीमत" वसूलेगा. इजरायल ने अपने दुश्मन के खिलाफ ‘ऑपरेशन आयरन स्वार्ड्स’ लॉन्च किया और अब हमास और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में इजरायल लगातार गाजा पट्टी पर हमला कर रहा है. इन हमलों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है.<br /><br />गाजापट्टी पर लगातार हो रहे हमले को देखते हुए अब कई देशों ने इजरायल की निंदा करनी शुरु कर दी है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने 24 अक्टूबर को को इसराइल-हमास के संघर्ष और फिलिस्तीन में मारे जा रहे आम लोगों को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है.<br /><br />संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के सत्र में एंटोनियो गुटरेस ने सात अक्टूबर को इसराइल पर हमास के हमले की निंदा की लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि चरमपंथी संगठन हमास ने जो किया वो ‘आचनक उठाया गया क़दम’ नहीं था, उसका भी एक संदर्भ है.<br /><br />उन्होंने आगे कहा कि, “बेशक नागरिकों को मारना और बंधक बनाना ग़लत है. लेकिन आम लोगों के घरों को निशाना बनाकर उनपर रॉकेट लॉन्च करना भी उचित नहीं ठहराया जा सकता.” उन्होंने आगे कहा कि, “ये समझना बेहद जरूरी है कि हमास का हमला अचानक ही नहीं हो गया. फ़लस्तीनी बीते 56 साल से दम घुटा देने वाले कब्ज़े में रह रहे हैं.”<br /><br />एंटोनियो गुदरेस के इस बयान के बाद इसराइल की भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत गिलाड अर्डन ने एंटोनियो गुटरेस के इस बयान पर ट्वीट करते हुए लिखा, “यूएन सेक्रेटरी जनरल, जो लोगों की सामूहिक हत्या, बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्गो की हत्या करने वालों के प्रति सहानुभूति रखता हो, वह संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख बनने के लिए उपयुक्त शख्स नहीं हो सकता.”<br /><br />“मैं आपके इस्तीफ़े की मांग करता हूँ. उन लोगों से बात करने का कोई औचित्य नहीं है, जो इसराइल के नागरिकों और यहूदी लोगों के ख़िलाफ़ किए गए सबसे भयानक अत्याचार करने वालों पर रहम दिखा रहे हैं.”</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितना पुराना है इजरायल फिलिस्तीन संघर्ष</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल आज जिस क्षेत्र को यरुशलम कहा जाता है वह 4000 साल पहले बेबीलोन और फिर ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा था. उस वक्त इस क्षेत्र में यहूदियों पर अत्याचार किया जाता था जिसके कारण यहां से यहूदी छिटककर यूरोप के दूसरे देशों में बसने लगे.</p>
<p style="text-align: justify;">साल 1941-45 के बीच, जब दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था उस वक्त हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों पर खूब अत्याचार और जमकर नरसंहार किया. इन अत्याचारों से परेशान यहुदियों ने जंग खत्म होने के बाद वापस अपनी धरती पर जाने का फैसला ले लिया. </p>
<p>अब आज जहां फिलिस्तीन और इजरायल है उस पर ब्रिटेन का कब्जा था. ब्रिटेन ने फिलिस्तीन से समझौता किया और यहूदियों के लिए इजरायल बनाने की कोशिश की. उस वक्त फिलिस्तीन में अरब रहा करते थे. अरब और यहूदियों के बीच संघर्ष को खत्म करने में असफल रहे ब्रिटेन ने साल 1947 में फिलिस्तीन से अपने सुरक्षा बलों को हटा कर अरब और यहूदियों के समस्या का समाधान करने के लिये इस मुद्दे को नवनिर्मित संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) को सौंप दिया.</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों में बांटा. हिब्रू कैलेंडर के अनुसार इजरायल की आज़ादी की घोषणा के 70 साल पूरे हो रहे हैं.</p>
<p>इजरायल के बनाए जाने के बाद लाखों की संख्या में फिलिस्तीनी अरबों को पलायन करना पड़ा था. वहीं दूसरी तरफ अरब देशों से लगभग छह लाख यहूदी शरणार्थी और विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में जिंदा बच गए ढाई लाख लोग इजरायल की स्थापना के कुछ सालों में वहां जाकर बस गए. इससे इजरायल में यहूदियों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई.</p>
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