राजस्थान के झालावाड़ जनपद के पीपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की एक जर्जर इमारत की छत बारिश के दौरान अचानक ढह गई, जिसके मलबे में दबकर 7 बच्चों की मौत हो गई। वहीं 32 बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण हादसा हुआ है।
झालावाड़ में सरकारी स्कूल में हुए दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। मनोहरथाना ब्लॉक के पीपलोदी गांव में स्थित सरकारी स्कूल की एक जर्जर इमारत की छत बारिश के दौरान अचानक ढह गई, जिसके मलबे में दबकर 7 बच्चों की मौत हो गई, जबकि 32 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे के बाद पीएम मोदी, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, सीएम भजनलाल सहित सभी नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
सभी बच्चे मलबे में दब गए
हादसा उस समय हुआ जब 7वीं कक्षा के 35 से ज्यादा बच्चे क्लासरूम में पढ़ाई कर रहे थे। भारी बारिश के बीच स्कूल का एक क्लासरूम पूरी तरह ढह गया और सभी बच्चे मलबे में दब गए। स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षकों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे बच्चों को बाहर निकाला। मनोहरथाना अस्पताल के डॉ कौशल लोढ़ा ने बताया कि 35 घायल बच्चों को अस्पताल लाया गया, जिनमें से 5 की मौत हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल 11 बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां 2 और ने दम तोड़ दिया।

मृतक बच्चों की हुई पहचान
मृतक बच्चों की पहचान पायल (14), प्रियंका (14), कार्तिक (8), हरीश (8), कान्हा, सतीश, कुंदन (12) और मीना के रूप में हुई है। घायल बच्चों में कुंदन, मिनी, वीरम, मिथुन, आरती, विशाल, अनुराधा, राजू, और शाहीना शामिल हैं, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए झालावाड़ रेफर किया गया है।
केन्द्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान ने जताया दुख
केन्द्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान ने झालावाड़ के पीपलोदा में स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि झालावाड़, राजस्थान में स्कूल की छत गिरने से विद्यार्थियों के हताहत होने की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से बात कर बचाव कार्यों का जायजा लिया। राहत और बचाव कार्य जारी है एवं घायल बच्चों के उपचार के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
एक साथ उठी 6 बच्चों की अर्थी
स्कूल हादसे का शिकार 7 बच्चों में से 6 बच्चों की अंत्येष्टि शनिवार को पिपलोदी गांव में की गई। जबकि एक बच्चे को पास के गांव चांदपुरा भीलान ले जाया गया। पिपलोदी गांव में जैसे ही एक साथ 6 बच्चों की अर्थियां उठी तो चीख पुकार कर मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सुबह 5:00 बजे सभी मृत बच्चों के शव परिजनों को सौंपे गए। जिन्हें मनोहर थाना अस्पताल से अलग-अलग गाड़ियों से घरों तक भिजवाया गया। जैसे ही शव पहुंचे तो पूरे गांव में कोहराम मच गया।
एक ही अर्थी पर गए भाई-बहन कान्हा और मीना
हादसे का शिकार हुए दो सगे भाई-बहन कान्हा और मीना को एक ही अर्थी पर श्मशान तक ले जाया गया। श्मशान में सभी लोगों की अंतिम क्रिया एक साथ की गई तथा पांच चिताओं पर छह बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया। सभी बच्चों की चिताओं को उनके पिताओं द्वारा मुखाग्नि दी गई। बच्चों की चिताओं को जैसे ही अग्नि दी गई तो वहां मौजूद लोगों की रुलाई फूट पड़ी। वहीं, एक बच्चे का गांव चांदपुरा भीलान में अंतिम संस्कार किया गया।
गांव में किसी के घर नहीं जला चूल्हा, पसरा सन्नाटा
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के किसी भी घर में कल से ही चूल्हा नहीं जला है तथा पूरे गांव में तनावपूर्ण मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव के लोगों में हादसे के बाद बहुत गुस्सा है। हादसे में दो परिवारों के इकलौते चिराग बुझ गए तो वहीं, एक परिवार की दोनों संतान है। मौत के मुंह में समा गई हैं। जिन बच्चों की मौत हुई है उनमें से अधिकांश की उम्र 7 से 10 साल के बीच है, तथा पारिवारिक स्थितियां बेहद खराब हैं। अधिकांश बच्चों के माता-पिता मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार चलते हैं।
यह भी पढ़ें: एअर इंडिया की दोहा जाने वाली फ्लाइट में आई तकनीकी खराबी, उड़ान के दो घंटे बाद वापस बुलाया
सत्यवार्ता से अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए वॉट्सएप चैनल को ज्वाइन करें https://whatsapp.com/channel/0029VaB40FS2ZjCiiziPWL02