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हाइलाइट्स
कार्तिक पूर्णिमा 26 नवंबर दोपहर 03 बजकर 53 मिनट से 27 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक है.
देव दीपावली पर 3 शुभ योग बन रहे हैं. उस दिन रवि योग, परिघ योग और शिव योग बन रहे है.
देव दीपावली पर दीप जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 08 मिनट से है.
देव दीपावली या देव दिवाली कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाते हैं. देव दीपावली दिवाली के 15 दिन बाद आती है. कार्तिक पूर्णिमा तिथि के प्रदोष काल में देव दीपावली मनाई जाती है. इस दिन वाराणसी में गंगा नदी के घाट और मंदिर दीयों की रोशनी से जगमग होते हैं. मानो जैसे सभी देवी और देवता स्वर्ग से धरती पर आकर शिव नगरी काशी में दिवाली मना रहे हों. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट बताते हैं कि इस साल देव दीपावली पर 3 शुभ योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं कि देव दीपावली कब है? देव दीपावली पर दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त क्या है? देव दीपावली का महत्व क्या है?
कब है देव दीपावली 2023?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक पूर्णिमा तिथि 26 नवंबर रविवार को दोपहर 03 बजकर 53 मिनट से अगले दिन 27 नवंबर सोमवार को दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक है. देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा तिथि में प्रदोष व्यापिनी मुहूर्त में मनाई जाती है, इसलिए इस साल देव दीपावली 26 नवंबर रविवार को मनाई जाएगी, जबकि कार्तिक पूर्णिमा का व्रत और स्नान-दान 27 नवंबर सोमवार को होगा.
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देव दीपावली 2023 दीप जलाने का शुभ मुहूर्त
इस बार देव दीपावली पर दीप जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 08 मिनट से शाम 07 बजकर 47 मिनट तक है. उस दिन आपको दीप जलाने के लिए 2 घंटे 39 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. 27 नवंबर को वाराणसी में सूर्यास्त शाम 05:08 बजे होगा. उस समय से प्रदोष काल प्रारंभ हो जाएगा.
3 शुभ योग में है देव दीपावली 2023
इस साल देव दीपावली पर 3 शुभ योग बन रहे हैं. उस दिन रवि योग, परिघ योग और शिव योग बन रहे है. देव दीपावली को प्रात: 06 बजकर 52 मिनट से रवि योग प्रारंभ होगा, जो दोपहर 02 बजकर 05 मिनट तक रहेगा. वहीं परिघ योग प्रात:काल से लेकर देर रात 12 बजकर 37 मिनट तक है, उसके बाद से शिव योग शुरू होगा. जो कार्तिक पूर्णिमा को रात तक रहेगा.
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देव दीपावली 2023 पर स्वर्ग की भद्रा
देव दीपावली को प्रात:काल से लेकर दोपहर 02 बजकर 05 मिनट तक भरणी नक्षत्र है. उसके बाद से कृत्तिका नक्षत्र है. उस दिन भद्रा भी लगेगी. भद्रा दोपहर 03 बजकर 53 मिनट से लेकर अगले दिन तड़के 03 बजकर 16 मिनट तक है. हालांकि भद्रा का वास स्वर्ग लोक में है. इसका दुष्प्रभाव पृथ्वी पर नहीं होता है.
देव दीपावली का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने असुरराज त्रिपुरासुर का वध करके देवों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. इस वजह से देवी और देवताओं ने शिव नगरी काशी में गंगा के तट पर स्नान किया, दीप जलाए और भगवान शिव की पूजा की. वह देवों की दीपावली थी, जो कार्तिक पूर्णिमा को प्रदोष काल में मनाई गई. तब से हर साल कार्तिक पूर्णिमा को काशी नगरी में गंगा के घाटों पर देव दीपावली मनाई जाती है. इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
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Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva, Religion
FIRST PUBLISHED : November 18, 2023, 09:32 IST
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