MEA On Former Navy Officials Death Sentence In Qatar Says Appeal Process Under Way Hope For Positive

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Former Navy Officials Death Sentence In Qatar: कतर में भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को सुनाई गई मौत की सजा के मामले में भारत ने कहा है कि अपील की प्रक्रिया जारी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार (16 नवंबर) को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि अपील से सकारात्मक परिणाम की आने की उम्मीद है.

प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर कतर के अधिकारियों के संपर्क में है और भारतीय नागरिकों को सभी कानूनी और दूतावास संबंधी सहायता देना जारी रखेगा. कतर की एक अदालत ने 26 अक्टूबर को भारतीय नौसेना के पूर्व आठ कर्मियों को मौत की सजा सुनाई थी और ट्रायल की डिटेल सार्वजनिक नहीं की थी.

क्या कहा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने?

भारत ने कतर की अदालत के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हैरानी जताई थी और मामले में सभी कानूनी विकल्प तलाशने का वादा किया था. गुरुवार को अरिंदम बागची ने कहा, ”मैं फिर से सभी से आग्रह करूंगा कि मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए अटकलों पर ध्यान न दें.”

पूरी प्रक्रिया में अदालत के फैसले को कतर की ओर से गोपनीय रखा गया है. बागची ने मामले पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ”अपील प्रक्रिया जारी है और हम सकारात्मक नतीजे की उम्मीद करेंगे.” प्रवक्ता ने उन कुछ रिपोर्टों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि मामले में अपील पर फैसला सुनाया जा चुका है.

‘पूर्व नौसेना अधिकारियों का नेवी में 20 वर्षों तक बेदाग कार्यकाल रहा’

आठों पूर्व नौसैन्य कर्मी एक प्राइवेट कंपनी अल-दहरा के साथ काम कर रहे थे. उन्हें पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया गया था. भारतीय नागरिकों पर कथित तौर पर जासूसी का आरोप लगा है. इसी साल 25 मार्च को उनके खिलाफ आरोप दायर किए गए थे और उन पर कतर के कानून के तहत मुकदमा चलाया गया था.

वहीं, पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि सभी पूर्व नौसेना अधिकारियों का नेवी में 20 वर्षों तक बेदाग कार्यकाल रहा है और उन्होंने इंस्ट्रक्टर्स समेत अहम पदों पर कार्य किया था.

मई में अल-दहरा ग्लोबल ने दोहा में अपना परिचालन बंद कर दिया और वहां काम करने वाले सभी लोग (मुख्य रूप से भारतीय) घर लौट आए हैं. अतीत में नौसेना ने पूर्व नौसैनिकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए उनका मामला सरकार के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष उठाया था.

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