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Pakistan Economic Crisis 40 Percent Population Below Poverty Line World Bank

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Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति कितनी खराब है, इसके सबूत तो हमें पड़ोसी मुल्क से सामने आने वाले वीडियो और तस्वीरों के जरिए मिल ही जाते हैं. कुछ वीडियो में लोगों को रोटियों के लिए लड़ते हुए भी देखा गया है. हालांकि, अब तो वर्ल्ड बैंक ने भी पाकिस्तानी के खस्ताहाल होने पर अपना बयान दिया है. वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह गरीबी के चरम बिंदु पर है. पड़ोसी मुल्क की 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है. 

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये चेतावनी ऐसे समय पर जारी की गई है, जब कुछ महीनों में देश में आम चुनाव करवाने की तैयारी हो रही है. वर्ल्ड बैंक ने जिस पॉलिसी के तहत चेतावनी दी है, उसका मकसद नई सरकार को ये बताना है कि आखिर उसे किस दिशा में सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत है. पाकिस्तान की नई सरकार के आगे सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और लोगों को गरीबी से बाहर करना होगा. 

पिछले साल 1.25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे गए

वर्ल्ड बैंक की तरफ से पाकिस्तान को सुझाव इसलिए दिए गए हैं, क्योंकि पाकिस्तान में गरीबी बढ़ती ही जा रही है. पिछले साल 1.25 करोड़ पाकिस्तानी गरीबी रेखा से नीचे चले गए. उनकी स्थिति ये हो गई है कि अब उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए तरसना पड़ रहा है. आंकड़े बता रहे हैं कि गरीबी 34.2 फीसदी से बढ़कर 39.4 फीसदी हो गई है. इसका मतलब हुआ कि लोग रोजाना गरीबी रेखा से नीचे की ओर जा रहे हैं. उनके लिए जरूरत की चीजें खरीदना भी बस की बात नहीं रही है.

वर्तमान तरीके से नहीं कम होगी गरीबी

पाकिस्तान को मौजूदा समय में गंभीर आर्थिक और मानव विकास संकटों का सामना करना पड़ रहा है. इससे ये बात तो बिल्कुल साफ है कि देश आज गरीबी को काबू करने में असमर्थ रहा है. ये एक ऐसी समस्या है, जो पाकिस्तान के लिए भविष्य में चुनौती बनने वाली है. पाकिस्तान के लिए वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर नैजी बेन्हासिन ने कहा कि ये वो समय है, जब पाकिस्तान को अपनी नीतियों को बदलना चाहिए, ताकि आर्थिक चुनौतियों से निपटा जा सके. 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मुद्रास्फीति, बिजली की बढ़ती कीमतें, गंभीर जलवायु संकट और विकास के लिए अपर्याप्त सार्वजनिक संसाधनों सहित कई आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है. नैजी ने ये भी कहा कि अभी विकास के जिस मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसके जरिए पाकिस्तान में गरीबी नहीं मिटाई जा सकती है. दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय सबसे ज्यादा कम है. 

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