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धरती पर वापसी के लिए ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार हुए शुभांशु, कल दोपहर तीन बजे कैलिफोर्निया के पास उतरेंगे

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिन बिताने के बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला सोमवार को धरती पर लौटने के लिए रवाना हुए। एक्सिओम-4 मिशन के तहत मंगलवार को उनका स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में उतरेगा।

आईएसएस में साथियों के साथ शुुभांशु शुक्ला। फाइल फाेटो।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिन बिताने के बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला सोमवार को धरती पर लौटने के लिए रवाना हुए। एक्सिओम-4 मिशन के तहत मंगलवार को उनका स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में उतरेगा।

शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम सोमवार दोपहर करीब दो बजे ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार हो गए। अंतरिक्ष स्टेशन से अनडॉकिंग भारतीय समय के अनुसार शाम 4:35 बजे होगी। इसके बाद स्पेसक्राफ्ट 22.5 घंटे की यात्रा के बाद मंगलवार दोपहर 3:01 बजे कैलिफोर्निया के तट के पास समुद्र में स्प्लैशडाउन करेगा। यह पूरी प्रक्रिया स्वचालित होगी।

कुछ इस तरह होगी शुभांशु की वापसी

ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट आईएसएस से अलग होने के बाद कुछ इंजन बर्न करेगा ताकि खुद को स्टेशन से सुरक्षित दूरी पर ले जा सके। इसके बाद वह पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करेगा। इस दौरान उसका तापमान 1,600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। दो चरणों में पैराशूट खुलेंगे पहले 5.7 किमी की ऊंचाई पर स्टेबलाइजिंग चूट्स और फिर लगभग दो किमी पर मेन पैराशूट खुलेंगे, जिससे स्पेसक्राफ्ट की सुरक्षित लैंडिंग संभव होगी।

आईएसएस पर हुआ विदाई समारोह

रविवार को आईएसएस पर एक्सपीडिशन-73 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक्सिओम-4 मिशन दल के लिए विदाई समारोह आयोजित किया। इस मौके पर शुभांशु ने कहा कि जल्द ही धरती पर मुलाकात करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस यात्रा की शुरुआत में इतना कुछ अनुभव होगा, इसकी कल्पना नहीं थी। यह यात्रा उनके लिए अविस्मरणीय रही।

शुक्ला ने अंतरिक्ष से भारत की तस्वीर पर बात करते हुए कहा कि साल 1984 में राकेश शर्मा ने जो भारत देखा, उसके बाद अब हम देख रहे हैं कि आज का भारत महत्वाकांक्षी, निडर, आत्मविश्वासी और गर्व से भरा दिखता है। यही कारण है कि मैं आज भी कह सकता हूं ‘सारे जहां से अच्छा है हमारा भारत’। उनका यह बयान भारत की बदलती अंतरिक्ष ताकत को भी दर्शाता है।

अंतरिक्ष भेजने में इसरों ने खर्च किए 550 करोड़

इस मिशन के लिए इसरो ने लगभग 550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह मिशन इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसे 2027 में लॉन्च किया जाना है। शुक्ला का यह अनुभव उस मिशन की तैयारी में बेहद उपयोगी साबित होगा।

धरती पर लौटने के बाद होगी पुनर्वास प्रक्रिया

स्पेस से लौटने के बाद शुक्ला और उनकी टीम को सात दिनों तक पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में ढलने के लिए पुनर्वास (रिहैबिलेशन) प्रक्रिया से गुजरना होगा। वजनहीन वातावरण में रहने के बाद शरीर को फिर से सामान्य स्थिति में लाने के लिए यह जरूरी है। इस पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिकों की निगरानी में किया जाएगा।

अंतरिक्ष में भारत की नई पहचान

शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि भारत की नई अंतरिक्ष पहचान का प्रतीक है। वे न केवल आईएसएस जाने वाले पहले भारतीय बने, बल्कि उन्होंने यह दिखा दिया कि भारत अब अंतरिक्ष अन्वेषण की अग्रणी दौड़ में शामिल हो चुका है। उनकी वापसी का हर भारतीय को बेसब्री से इंतजार है।

मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- शुभांशु ने रचा इतिहास

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि आज शाम 4:30 बजे शुभांशु शुक्ला का स्पेसक्राफ्ट आईएसएस से अनडॉक होगा। उन्होंने बताया कि शुक्ला ने अंतरिक्ष में जो प्रयोग किए, वे पूरी तरह से स्वदेशी किट और तकनीक पर आधारित थे। ये किट भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आईआईएससी बेंगलुरु और आईआईटी जैसे संस्थानों ने बनाए थे। ये जीवन विज्ञान और प्लांटेशन से जुड़े प्रयोग सभी के लिए उपयोगी साबित होंगे।

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