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Vakratunda Sankashti Chaturthi 2023: कब है वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी? सर्वार्थ सिद्धि योग में करें गणेश पूजा, जानें मुहूर्त और चंद्रोदय समय

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हाइलाइट्स

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरूआत 31 अक्टूबर को रात 09:30 बजे से होगी.
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, परिघ योग और शिव योग बन रहा है.
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा.

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है. हर साल कार्तिक माह के कृष्ण् पक्ष की चतुर्थी तिथि को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी होती है. इस बार वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि समेत 3 योग बन रहे हैं और 4 संयोग भी बन रहे हैं. इस दिन गणेश जी की पूजा करते हैं और रात के समय में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं. बिना चंद्र अर्घ्य के यह व्रत पूर्ण नहीं होता है. इस ​दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं ​कि वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत कब है? पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय क्या है?

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत 2023 कब है?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत 31 अक्टूबर को रात 09:30 बजे से होगी और इस तिथि की समाप्ति 01 नवंबर को रात 09 बजकर 19 मिनट पर होगी. उदया​तिथि के आधार पर देखा जाए तो वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत 1 नवंबर को रखना चाहिए.

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3 शुभ योग में वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, परिघ योग और शिव योग बन रहा है. उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:33 बजे से अलगे दिन सुबह 04:36 बजे तक है. इस दिन परिघ योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 02:07 बजे तक है, उसके बाद से शिव योग प्रारंभ हो जाएगा, जो रात तक रहेगा.

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर 4 शुभ संयोग
इस साल 4 शुभ संयोग में वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी. वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के दिन करवा चौथ और रुद्राभिषेक का संयोग बना है. उसके अलावा बुधवार दिन भी गणेश पूजा के लिए है. इस तरह से वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर 4 शुभ संयोग बनेंगे. वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर रुद्राभिषेक सूर्योदय से कर सकते हैं. पूरे दिन शिववास है.

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वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा. उस समय आपको चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए. उसके बाद कच्चे दूध, पानी, अक्षत् और सफेद फूल से चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए.

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का महत्व
इस व्रत को रखकर गणेश जी की पूजा करने से संकट दूर होते हैं. गणपति बप्पा के आशीर्वाद से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कार्यों में आने वाली विघ्न और बाधाएं खत्म होती हैं, कार्य में सफलता प्राप्त होती है.

Tags: Dharma Aastha, Lord ganapati, Religion

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