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<p style="text-align: justify;">पिछले 13 दिनों से इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध ने पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. साल 2020 के सितंबर महीने में यूएई और बहरीन ने इजरायल के साथ अब्राहम समझौता किया था. इस समझौते के बाद से यूएई और इजरायल के रिश्तों में पहले की तुलना में काफी सुधार आया था. </p>
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<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">यूएई के बाद अब अमेरिका सऊदी अरब और मध्य-पूर्व में अरब मुल्कों के साथ इजरायल से रिश्ते सुधारने की कोशिश में था. हालांकि अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्ते सऊदी पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या के बाद बिगड़े और इजरायल के साथ उनके रिश्ते सुधारने की कोशिश एक तरह से ठंडे बस्ते में चली गई.</p>
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<p style="text-align: justify;">इस साल के सितंबर महीने में जब सऊदी अरब और इजराइल के बीच मध्यस्थता में एक समझौता हुई, जिसके बारे में बात करते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सितंबर में कहा था कि ये समझौता मध्य-पूर्व के भू राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा-हमेशा के लिए बदल देगा.</p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के साथ रिश्ते को सामान्य करने के लिए, सऊदी अरब ने अमेरिका से बड़ा सैन्य समर्थन, फिलस्तीन के लिए कई तरह की मांग और असैन्य परमाणु कार्यक्रम की स्थापना की मांग की थी. अब इस समझौते के एक महीने बाद ही हमास का इजरायल पर हुए हमले ने इन देनों देशों के बेहतर होते रिश्ते पर ब्रेक लगा दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अरब देशों का इजरायल के तरफ नरम रुख </strong></p>
<p style="text-align: justify;">साल 2020 में अब्राहम समझौते के बाद से ही यूएई औ इजरायल के रिश्ते सुधरने लगे थे. इसका सबसे ताजा उदाहरण हमास और इजरायल के युद्ध के शुरुआत में देखा गया. दरअसल युद्ध के दौरान एक तरफ जहां लगभग कई मुस्लिम देश फिलिस्तीन के साथ थे. वहीं यूएई और बहरीन ने हमास द्वारा किए गए हमले की निंदा कर इजरायल को अपना समर्थन दिया था. </p>
<p style="text-align: justify;">इजरायल और यूएई के रिश्ते को बेहतर बनाने में सबसे बड़ा हाथ अमेरिका का ही रहा है. इसी देश की कोशिश ने यूएई-बहरीन और इजरायल के बीच अब्राहम समझौते को मुमकिन बनाया था.</p>
<p style="text-align: justify;">अब साल 2023 के 18 अक्टूबर को अरब देशों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइ़डेन का शिखर सम्मेलन होने वाला था. इस सम्मेलन में यकीनन यूएई और बहरीन अमेरिका के साथ मिलकर इजरायल के साथ अच्छे रिश्ते स्थापित करने की सिफारिश करता. </p>
<p style="text-align: justify;">अरब देश और इजरायल के रिश्ते एक अच्छा मोड़ लेते इससे पहले ही 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया. जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने भी गाजा पट्टी पर हमला किया और अब इजरायल और हमास के बीच पिछले 13 दिनों से लगातार युद्ध चल रहा है. </p>
<p style="text-align: justify;">शुरुआत में यूएई और बहरीन ने भले ही हमास के हमले की निंदा की थी, लेकिन इजरायल के जवाबी हमले और गाजा पट्टी के हजारों लोगों की मौत ने हालात बदल दिए हैं. अब एक बार फिर अरब देश एकजुट होकर इजरायल के इस हमले की आलोचना कर रहे हैं. </p>
<p style="text-align: justify;">इस पूरे युद्ध और अरब देशों का रुख देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका ने अब्राहम समझौते के जरिए अरब और यहूदियों के बीच जो बेहतर रिश्ते कायम करने की शुरुआत की थी उस पर आने वाले समय में ब्रेक लग जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे में एक सवाल ये भी उठता है कि हमास ने हमला इसी दौरान क्यों किया जब अमेरिका साउदी अरब और इजरायल के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिश को आगे बढ़ाने वाला था? आखिर अरब देश इजरायल से किसी तरह का रिश्ता क्यों नहीं रखना चाहते हैं? </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शुरुआत में यूएई बहरीन ने की थी हमास की निंदा </strong></p>
<p style="text-align: justify;">12 दिन पहले जब पहली बार हमास ने इजरायल के रिहायशी इलाकों पर हमला किया था. उस वक्त इजरायल फिलिस्तीन लड़ाई को लेकर यूएई ने जो कहा है, उससे ये साफ नजर आ गया था कि इजरायल को लेकर इस्लामिक देश के रुख में बड़ा बदलाव आया है.</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल यूएई के विदेश मंत्रालय ने इस लड़ाई के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने कहा हमास के इजरायली शहरों पर हमला बेहद गंभीर है और इससे भारी तनाव पैदा हुआ है. यहां गौर करने वाली बात ये थी यूएई ने अपने बयान में इजरायल के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी. </p>
<p style="text-align: justify;">वहीं अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला एक और अरब देश बहरीन ने भी हमास के इस हमले की निंदा की थी.</p>
<p style="text-align: justify;">बहरीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि हमास के हमले से स्थिति खतरनाक रूप से तनावपूर्ण हुई है. बहरीन नागरिकों को उनके घरों से बंधक बनाए जाने की निंदा करता है.’ बयान में इस युद्ध को रोकने के लिए तुरंत प्रयास करने का आह्वान भी किया गया था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हमले के 12 दिन बाद इजरायल के विरोध में आया यूएई और बहरीन </strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस युद्ध की शुरुआत भले ही हमास ने की हो लेकिन जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने पिछले 12 दिनों में लगभग पूरी गाजा पट्टी को तहस- नहस कर दिया है. इजरायल की जवाबी कार्रवाई को देखते हुए रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव जारी किया था जिसे 16 अक्टूबर को खारिज कर दिया गया. </p>
<p style="text-align: justify;">रूसी प्रस्ताव में दोनों ही पक्षों के बीच चल रहे युद्ध में आम नागरिकों के जा रही जान, हिंसा और आतंकवाद की निंदा की गई थी. रूस के इस प्रस्ताव पर 15 सदस्यों वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चार देश- चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) मोजाम्बिक और गैबॉन ने अपनी सहमति जताई थी. चार अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान ने रूसी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अरब और इजरायल के रिश्ते आखिर क्यों थे इतने खराब </strong></p>
<p style="text-align: justify;">अरब के देशों और इजरायल के बीच की दुश्मनी साल 1967 में छह दिनों के भीषण युद्ध के बाद से बढ़ गई थी. इस युद्ध में इजराइल की जीत हुई थी और एकजुट होने के बाद भी अरब देशों को हार का सामना करना पड़ा था.</p>
<p style="text-align: justify;">इस बात को भले ही 55 साल बीत चुके हों, लेकिन साल 2020 तक अरब देशों और इजरायल के आपसी संबंधों में कटुता कम होती नहीं नजर आ रही थी. 2020 में यूएई और बहरीन ने एक समझौते के तहत पहली बार रिश्ता कायम करने की कोशिश की गई.</p>
<p style="text-align: justify;">इन दोनों अरब देशों को छोड़ दें तो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया से लेकर सबसे समृद्ध मुस्लिम मुल्कों में गिने जाने वाले कतर ने इतने सालों बाद भी इजरायल के साथ किसी तरह का कोई राजनयिक संबंध नहीं रखा हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे में सउदी और बहरीन के बीच बेहतर हो रहे रिश्ते के खिलाफ ये एक चाल भी हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सऊदी- इजरायल समझौते पर नाराज था ईरान ? </strong></p>
<p style="text-align: justify;">सऊदी अरब में ईरान के बीच साल 2016 से ही राजनयिक संबंध टूट गए थे. दरअसल सऊदी ने 2016 में एक जाने-माने शिया धर्म गुरु को फांसी दिए दे दी थी. हालांकि साल 2023 में चीन की कोशिश ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध फिर से बहाल करवा दिया था. लेकिन रिश्ते बहाल होने का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच विवादित मुद्दे कम हो गए हैं. सऊदी अरब अमेरिका का अहम सहयोगी है और ईरान और अमेरिका के रिश्ते अब भी बहुत अच्छे नहीं हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">जब अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल और सऊदी अरब के बेहतर रिश्ते कायम करने की कोशिशें की जा रही थी. लेकिन ईरान नहीं चाहता है कि मध्य-पूर्व में या इस्लामिक देशों की सरकारें इजरायल को स्वीकार करें.</p>
<p style="text-align: justify;">वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सितंबर महीने में ही फॉक्स न्यूज को कहा था कि इजराइल से रिश्ते सामान्य करने की दिशा में हर दिन क़रीब आ रहे हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या इजरायल से बेहतर रिश्ते नहीं चाहते हैं अरब देश </strong></p>
<p style="text-align: justify;"><a title="साल 2023" href="https://www.abplive.com/topic/new-year-2023" data-type="interlinkingkeywords">साल 2023</a> के सितम्बर महीने में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा था कि इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने से सुरक्षा नहीं आएगी. ईरान और इजरायल के रिश्ते दशकों से खराब है.</p>
<p style="text-align: justify;">ईरान इजरायल को मान्यता नहीं देता है जबकि कई बार इजरायल भी ये साफ कह चुका है कि वह परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को बर्दाश्त नहीं करेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">रईसी ने इसी महासभा के बाद सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में फिलिस्तीन का मुद्दा भी उठाया था. उन्होंने कहा था, "रिश्ते सामान्य करने की कोशिशें पहले भी हुई हैं लेकिन सफलता नहीं मिली. 75 साल बाद ये समाधान है भी नहीं.</p>
<p style="text-align: justify;">इजरायल को फिलिस्तीन के लोगों को उनके अधिकार देने के सिद्धांत की तरफ लौटना चाहिए. मूल मुद्दों का हल निकालने की जगह वे थोपा हुआ सामान्य माहौल बनाना चाहते हैं. "</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका के साथ होने वाले शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले गाजा के अस्पताल में हमला </strong></p>
<p style="text-align: justify;">12 दिन से चल रहे युद्ध ने 17 अक्टूबर को एक ऐसा मोड़ ले लिया है जिसने ज्यादातर देशों को इजरायल के खिलाफ कर दिया है. दरअसल 17 अक्टूबर को गाजा पट्टी के एक अस्पताल में हमला किया गया, इस हमले में लगभग 500 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस अस्पताल में हमले के वक्त न सिर्फ इलाज कराने वाले लोग और डॉक्टर मौजूद थे, बल्कि बहुत सारे लोग वहां शेल्टर के तौर पर रह रहे थे. ऐसे में अस्पताल पर धमाका गिराया जाना एक क्रूर कृत्य के रूप में देखा जा रहा है. </p>
<p style="text-align: justify;">इस हमले के एक दिन बाद ही जो बाइडेन के साथ अरब देशों का शिखर सम्मेलन होना था. लेकिन इसे रद्द कर दिया गया. राष्ट्रपति बाइडेन ने गाजा के अस्पताल पर हुए हमले पर दुख भी जताया है.</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, "मैं गाजा के अल अहली अरब अस्पताल में हुए विस्फोट और उसमें हुई जानमाल की हानि से दुखी हूं. जैसे ही मैंने इस घटना के बारे में सुना तो जॉर्डन किंग अब्दुल्ला और इजरायल के पीएम नेतन्याहू से बात की और अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम को इस घटना के बारे में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए कि वास्तव में क्या हुआ था."</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या है अब्राहम समझौता </strong></p>
<p style="text-align: justify;">अब्राहम समझौता इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच 13 अगस्त 2020 को हुआ था. उसी साल 11 सितंबर को इन दोनों देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर भी किए.</p>
<p style="text-align: justify;">अब्राहम इस नाम की खासियत ये है कि इसे इस्लाम, ईसाई और यहूदी, तीनों ही धर्मों में पवित्रता के साथ लिया जाता है. इसका मतलब है- सहयोग की भावना. अब्राहम समझौते का मुख्य मकसद अरब और इजरायल के बीच आर्थिक, राजनयिक और सांस्कृतिक स्तर पर संबंधों को सामान्य बनाना था.</p>
<p style="text-align: justify;">इस समझौते के तहत यूएई, बहरीन और इजरायल ने एक दूसरे के यहां दूतावास खोलने और राजदूतों की नियुक्ति पर सहमति जताई थी. अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देशों ने एक दूसरे के साथ ट्रेड, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और पर्यटन के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाने का संकल्प लिया गया था. इसके साथ ही समझौते का मकसद खेल, शिक्षा और पर्यटन के जरिए लोगों के बीच आवाजाही को भी बढ़ावा देना था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब और क्यों हुई इस जंग की शुरुआत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इजरायल पर फिलिस्तीन संगठन हमास ने 7 अक्टूबर की सुबह लगभग 20 मिनट में 5 हजार से ज्यादा रॉकेट दाग दिए थे. ये रॉकेट इजरायल के रिहायशी इमारतों पर गिरे और धमाकों में हजारों लोगों की जान चली गई. इस हमले को हमास ने ऑपरेशन ‘अल-अक्सा फ्लड’ का नाम दिया. </p>
<p style="text-align: justify;">इस हमले के घंटे बाद ही इजरायल ने ‘युद्ध’ की घोषणा कर दी और जवाबी कार्रवाई में गाजा पट्टी में हमास के 17 सैन्य ठिकानों और 4 हेडक्वार्टर पर हवाई हमला किया. इस हमले में भी कई लोगों की मौत हुई .</p>
<p style="text-align: justify;">इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध की घोषणा करते हुए कहा कि फिलिस्तीन अपने दुश्मन से "अभूतपूर्व कीमत" वसूलेगा. इजरायल ने अपने दुश्मन के खिलाफ ‘ऑपरेशन आयरन स्वार्ड्स’ लॉन्च किया है.</p>
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