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<p style="text-align: justify;">27 अक्टूबर को जॉर्डन की तरफ से संयुक्त राष्ट्र आम सभा में इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष को मानवीय आधार पर तुरंत विराम लगाने का प्रस्ताव पेश किया गया था. इस प्रस्ताव को बहुमत से स्वीकार कर लिया गया. लेकिन खास बात ये रही कि इस मतदान के दौरान मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट स्टैंड लेने वाला देश भारत अनुपस्थित रहा. </p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि जॉर्डन के प्रस्ताव पर मतदान से पहले भारत ने कनाडा के उस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जिसके एक अतिरिक्त खंड में हमास के आतंकवादी हमलों की निंदा की गई थी. हालांकि महासभा में कनाडा के इस प्रस्ताव को अपनाया नहीं गया था.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत अकेला ऐसा देश नहीं था जिसने इस प्रस्ताव से किनारा कर लिया था. भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान, नीदरलैंड्स, ट्यूनीशिया, यूक्रेन, कनाडा, डेनमार्क, इथियोपिया, जर्मनी, ग्रीस, इराक़, इटली और ब्रिटेन सहित 45 देश इस मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे थे.</p>
<p style="text-align: justify;">जॉर्डन की तरफ से पेश किए गए इस प्रस्ताव के समर्थन में 120 देशों ने मतदान किया जबकि विरोध में 14 देशों ने अपने वोट डाले. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका इकलौता बड़ा और प्रभावशाली देश है जिसने इस वोटिंग के दौरान इजरायल का समर्थन किया.</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे में सवाल उठता है कि जब भारत की नीति शुरुआत से ही फिलिस्तीनियों के प्रति सहानुभूति की रही है तो मानवीय आधार पर आए इस प्रस्ताव से भारत ने खुद को क्यों किनारा कर लिया?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जॉर्डन की तरफ से पेश किए गए प्रस्ताव में क्या था </strong></p>
<p style="text-align: justify;">जॉर्डन की तरफ से पेश किए गए इस प्रस्ताव में गाजा में इजरायली सेनाओं और हमास के आतंकवादियों के बीच तत्काल, टिकाऊ और निरंतर मानवीय संघर्ष विराम का आह्वान किया गया था. इस प्रस्ताव में हमास के तरफ से की गई आतंकवादी हमले की निंदा नहीं की गई थी. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत ने किनारा क्यों किया?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मतदान से दूर रहने के भारत के फैसले के बारे में बताते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने कहा कि आतंक का कोई औचित्य नहीं है और देश 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए आतंकी हमले से सदमे में है. भारत ने इस्लामिक आतंकवादी समूह हमास द्वारा गाजा में बंधक बनाए गए बंधकों की रिहाई का भी आह्वान किया और गाजा में मानवीय संकट को चिंताजनक बताते हुए तनाव कम करने के सभी प्रयासों का स्वागत किया. योजना पटेल ने लंबे समय से चले आ रहे इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के लिए भारत के टू स्टेट समझौता को भी दोहराया. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या है टू-स्टेट समझौता </strong></p>
<p style="text-align: justify;">7 अक्टूबर को हमास द्वारा इजरायल पर हमला किए जाने के बाद से ही टू-स्टेट समझौता चर्चा में आ गया है. अमेरिका ने भी अपने एक बयान में कहा था कि हमारे विचार से इस पूरे मामले को द्विराष्ट्र समाधान यानी टू-स्टेट समझौते के जरिए हल करना चाहिए. भारत भी संयुक्त राष्ट्र से लेकर हर एक अंतरराष्ट्रीय मंच से इस समझौते की वकालत करता रहा है. कुछ दिनों पहले ही भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टू-स्टेट समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि भी की थी. </p>
<p style="text-align: justify;">सदियों से चल रहे इजरायल फिलिस्तीन विवाद को रोकने के लिए टू-स्टेट समझौते में जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच की जमीन को विभाजित करके दो स्वतंत्र, संप्रभु इजरायली और फिलिस्तीनी राज्यों को अगल-बगल में स्थापित करने की बात कही गई है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों नहीं हो पा रहा टू-स्टेट समझौता </strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस समझौते पर दोनों देशों का एकमत होना अब तक असंभव साबित हुआ है. साल 2014 में अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश की थी, लेकिन वह विफल रहे. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत संतुलन बनाए रखने की कोशिश में </strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत के इस कदम पर विश्लेषकों का मानना है कि भारत इस पूरे मामले में कूटनीतिक स्तर पर एक संतुलन बनाये रखने की कोशिश कर रहा है. </p>
<p style="text-align: justify;">जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर मुदस्सिर कमर कहते हैं, “भारत और इजरायल एक दूसरे के साथ मजबूत रिश्ते साझा करते हैं और इस देशों का फिलिस्तीनियों को लेकर खुला स्टैंड है." </p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने आगे कहा कि भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रहा. जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी किनारा कर लिया था और इसकी एक वजह ये है कि इस प्रस्ताव को अरब देशों की तरफ से लाया गया था. भारत इस मुद्दे पर एक संतुलन बनाए रखना चाहता है.”</p>
<p style="text-align: justify;">वहीं दूसरी तरफ बीबीसी की एक रिपोर्ट में जामिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मोहम्मद सोहराब कहते हैं, “जॉर्डन की तरफ से पेश किया गया यह प्रस्ताव मानवीय आधार पर था. इसमें मानवीय कॉरिडोर बनाने की मांग थी, गाजा के नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा की मांग थी. ऐसे में मुझे लगता है कि इस तरह के मानवीय मुद्दे पर प्रस्ताव से खुद का किनारा कर के भारत उस नैतिक स्टैंड से पीछे हट गया है जिसे यह देश ऐतिहासिक रूप से अपनाता रहा है और जो भारतीय सभ्यता का मूलमंत्र भी है. भारत का ये कदम मानवीय मूल्यों से पीछे हटने जैसा है. ऐसा करने से दुनिया के अन्य देशों को ऐसा गया होगा कि भारत अपनी सभ्यता के मूल्यों से पीछे हट रहा है.”</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इजरायल से रिश्ता नहीं खराब करना चाहता भारत </strong></p>
<p style="text-align: justify;">इजरायल-फिलिस्तीन के विवाद के इतिहास में देखें तो भारत हमेशा से ही फिलिस्तीनियों के लिए अलग राष्ट्र का समर्थन करने की नीति अपनाता रहा है. लेकिन इस वक्त भारत के लिए इजरायल के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखना भी उतना ही अहम है और भारत बिल्कुल नहीं चाहेगा कि वो इन दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध में फंसकर अपने मित्र देश को नाराज करे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत के लिए इजरायल से रिश्ते इतना अहम क्यों </strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत के द्विपक्षीय संबंध इसराइल के साथ हाल के सालों में बहुत मजबूत हुए हैं. दोनों देशों के बीच बेहद नजदीकी सुरक्षा संबंध है. भारत इजरायल से हथियार लेता है. इसके अलावा इजरायल में लगभग 14 हजार के करीब भारतीय नागरिक रहते हैं और इसी देश में भारतीय मूल के 85,000 यहूदा हैं जो सभी इजरायल पासपोर्ट धारक हैं. यही कारण है कि वर्तमान में जो इजरायल फिलिस्तीन के बीच स्थिति बनी हुई है उसमें भारत का इसराइल के साथ संबंधों को नजरअंदाज करना संभव है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत में फिलिस्तीन के मामले में राजनीतिक दलों का रुख क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">7 अक्टूबर को पहली बार जब हमास के आतंकियों ने इजरायल पर हमला कर दिया था उसके तुरंत बाद भारतीय प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया और खुलकर इजरायल का समर्थन किया. इस ट्वीट के कुछ दिन बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने एक और बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में भारत फिलिस्तीनियों के मुद्दे के भी साथ है. </p>
<p><strong>कब और क्यों हुई इस जंग की शुरुआत</strong></p>
<p>इजरायल पर फिलिस्तीन संगठन हमास ने 7 अक्टूबर की सुबह महज 20 मिनट में 5 हजार रॉकेट दागे. ये रॉकेट इजरायल के रिहायशी इमारतों पर गिरे जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई. इस हमले को हमास ने ऑपरेशन ‘अल-अक्सा फ्लड’ का नाम दिया. </p>
<p>इजरायल ने भी खुद पर हुए हमले के तुरंत बाद ही इस देश ने ‘युद्ध’ की घोषणा कर दी और इजरायल ने गाजा पट्टी में हमास के 17 सैन्य ठिकानों और 4 हेडक्वार्टर पर हवाई हमला किया. इस हमले में भी कई लोगों की मौत हुई .</p>
<p>इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध की घोषणा करते हुए कहा कि फिलिस्तीन अपने दुश्मन से "अभूतपूर्व कीमत" वसूलेगा. इजरायल ने अपने दुश्मन के खिलाफ ‘ऑपरेशन आयरन स्वार्ड्स’ लॉन्च किया है. अब इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध को एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अबतक कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है. </p>
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