कहानी चीन में छिपे उस 'सिंघम' की, जो भारत और अमेरिका के रडार पर है

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<p style="text-align: justify;">अमेरिकी व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूछताछ के लिए समन भेजा है. ईडी समाचार वेबसाइट न्यूजक्लिक के फंडिंग मामले में उनसे पूछताछ करना चाह रही है. न्यूजक्लिक पर चीन से पैसे लेकर प्रोपेगंडा फैलाने का आरोप है.</p>
<p style="text-align: justify;">नेविल रॉय सिंघम अगस्त 2023 में पहली बार तब सुर्खियों में आए थे, जब एक अमेरिकी अखबार ने यह खुलासा किया था कि सिंघम की कंपनी चीन सरकार से पैसे लेकर पूरी दुनिया में उसके सुनियोजित प्रोपेगंडा को फैला रही है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस रिपोर्ट से दुनिया के कई देशों में हंगामा मच गया. अमेरिका, भारत समेत कई देशों ने इस मामले की जांच शुरू कर दी. भारतीय जांच एजेंसी ने पहली बार सीधे तौर पर सिंघम को ही समन जारी किया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><em>आइए इस स्टोरी में सिंघम की कहानी और उसके कामकाज के बारे में विस्तार से जानते हैं…</em></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नेविल रॉय सिंघम कौन हैं?</strong><br />1954 में अमेरिका में जन्मे नेविल रॉय सिंघम के पिता श्रीलंकाई मूल के थे. सिंघम के पिता का नाम आर्चीबाल्ड विक्रमाराजा सिंघम था.<br />आर्चीबाल्ड का जन्म बर्मा (अब म्यांमार) में हुआ था, जो ब्रिटिश आधिपत्य का हिस्सा था.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही सिंघम अमेरिका के मजदूर संगठन रिवोल्यूशनरी ब्लैक वर्कर्स लीग में शामिल हो गए, जहां उन्होंने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया. यह लीग वामपंथी विचारधारा से जुड़ा हुआ था.</p>
<p style="text-align: justify;">सिंघम इसके बाद पढ़ाई करने के लिए हावर्ड विश्विद्यालय चले गए. यहां से लौटकर 1980 में उन्होंने कंस्लटेंसी फॉर्म थॉटवर्क की स्थापना की. शुरुआत में यह फॉर्म सिर्फ शिकागो तक ही सीमित था.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">2001 से 2008 तक सिंघम हुआवेई के लिए बतौर एक रणनीतिक तकनीकी सलाहकार के रूप में काम किया. इसके बाद सिंघम ने काफी तरक्की की और उनकी कंपनी ने माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल और द गार्जियन जैसे कंपनियों को टेक सलाह देना शुरू किया.</p>
<p style="text-align: justify;">सिंघम की कंपनी ने इसके बाद मुख्य रूप से चीन पर फोकस किया और यहीं पर अपना कंपनी का मुख्यालय शिफ्ट हो गया. कंपनी के चीन शिफ्ट करने के पीछे एक बड़ी वजह सिंघम का मार्क्सवाद विचारधारा को भी माना जाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सिंघम की कंपनी थॉटवर्क वर्तमान में दुनियाभर के 30 से ज्यादा कंपनियों के साथ काम कर रही है. इनमें बैंक, मीडिया समूह आदि शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत में रडार पर क्यों हैं सिंघम?</strong><br />सिंघम पर अमेरिकी अखबार के खुलासे के बाद भारत सरकार की कई एजेंसियां सक्रिय हो गई. अक्टूबर में दिल्ली पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज किया. इस एफआईआर में नेविल रॉय सिंघम, पत्रकार प्रबीर पुरकायस्थ, इतिहासकार विजय प्रसाद और अन्य को आरोपी बनाया गया.</p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया कि इन सभी लोगों न्यूजक्लिक वेबसाइट के जरिए भारत सरकार के कोविड-19 को नियंत्रित करने के प्रयासों को बदनाम करने के लिए सक्रिय रूप से झूठी कहानियां प्रचारित की.</p>
<p style="text-align: justify;">एफआईआर में आगे कहा गया है कि उन्होंने घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग और राष्ट्र-विरोधी ताकतों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई भारत सरकार की नीतियों और विकास पहलों के बारे में भ्रामक और झूठी कहानी को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय हित के खिलाफ काम किया है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस केस में यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियां), 16 (आतंकवादी अधिनियम), धारा 17 (आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाना), धारा 18 (साजिश) और धारा 22 सी (कंपनियों द्वारा अपराध), तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय की टीम एक साथ जांच को लेकर सक्रिय हो गई. प्रबीर पुरकायस्थ अभी ईडी की गिरफ्त में हैं. वहीं अब सरकारी एजेंसी सिंघम पर नकेल कसने की तैयारी में है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिकी अखबार के खुलासे में क्या था?</strong><br />न्यूयॉर्क टाइम्स ने अगस्त 2023 में सिंघम और उनकी कंपनी को लेकर बड़ा खुलासा किया था. अखबार ने लिखा था कि चीन दुनिया में अगुवा बनने के लिए इस वक्त धूम्र रहित युद्द (स्मॉकलेस वार) का सहारा ले रहा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">चीन के स्मॉकलेस वार को जमीन पर उतारने का काम सिंघम की कंपनी कर रही है. सिंघम पर आरोप है कि शेल कंपनियों से फंडिंग कराकर वे इन कामों को अंजाम देते हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक चीन के स्मॉकलेस वार को प्रभावी करने के लिए दक्षिण अफ्रीका में राजनीतिक दल, भारत और ब्राजील में मीडिया और मैसाचुसेट्स में थिंक टैंक आउटलेट्स का सहारा ले रहा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सिंघम पर आरोप है कि उनकी कंपनी उन कंटेंट को बढ़ावा देती है, जो चीन सरकर के प्रभुत्व को दिखाती है. यानी सिंघम उन कंपनियों को फंड करती है, जो किसी देश में वामपंथ विचारधारा के लिए वहां की सरकार और सिस्टम के खिलाफ बिगुल फूंकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक वामपंथ आधारित कंटेंट को फैलाने के लिए सिंघम नई कंपनियों में निवेश करते हैं और वहां बड़े-बड़े पत्रकारों को रखा जाता है, जिससे विचारधारा जल्द ही लोगों के बीच सर्कुलेट होना शुरू हो जाए.</p>
<p style="text-align: justify;">सिंघम की कंपनी कई गैर-सरकारी संस्था को भी फंडिंग करती है, जो नो कोल्ड वार जैसा मुहिम दुनिया भर में चलाती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">हाल ही में द फ्री प्रेस के फ्रांसेस्का ब्लॉक की एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. इसके मुताबिक इजरायल पर हमास अटैक के बाद जो युद्ध शुरू हुआ है, उसके विरोध में पीपुल्स फोरम नामक एक समहू ने कई कार्यक्रम में आयोजित करवाए.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संस्था को भी सिंघम की कंपनी ही फंड देती है. इसके अनुसार पीपुल्स फोरम खुद को मजदूर वर्ग और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए आंदोलन इनक्यूबेटर के रूप में पेश करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, सिंघम और उसकी कंपनी से जुड़े लोग लगातार चीन के फंड पर प्रोपगेंडा फैलाने के आरोप को खारिज कर रहा है. सिंघम की कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा था कि उनके बारे में जो रिपोर्ट आई हैं, वो पूर्णत: निराधार है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिंघम पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी की नजर</strong><br />द डेली बिट्स ने मई 2023 में एक रिपोर्ट सिंघम के कामकाज को लेकर किया था. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जब यूक्रेन-रूस का युद्ध शुरू हुआ, तो सिंघम की कपंनी ने रूस के समर्थन में कई रिपोर्ट तैयार करवाए, जिसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म के जरिए पब्लिक डोमेन में लाया गया.</p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध को लेकर जिन कंटेंट को प्रोड्युस किया गया, उसमें यह बताया गया कि कैसे अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार मुहैया कराए और कैसे नाटो तृतीय विश्वयुद्ध चाहता है?</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद खुफिया एजेंसी ने उनके आउटलेट्स पर नजर रखनी शुरू कर दी है. अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो ने अगस्त 2023 में देश के अटॉर्नी जनरल को एक पत्र लिखा था और सिंघम के एजेंडे की सही तरीके से जांच कराने की मांग की थी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">द लाइन्स मैगजीन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि चीन के उइगर मुसलमानों की व्यथा को छुपाने के लिए सिंघम की कंपनी ने 65 मिलियन डॉलर रुपए खर्च किए.</p>

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