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<p style="text-align: justify;">"मैं ये अवॉर्ड उन अफगान नागरिकों के नाम करता हूं, जिन्हें पाकिस्तान से जबरन अफगानिस्तान भेजा जा रहा है." ये शब्द 23 अक्टूबर को ICC वर्ल्ड कप 2023 में खेले गए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हुए मैच में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बने क्रिकेटर इब्राहिम जादरान के हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल इस मैच में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को हरा दिया था. जिसके बाद इब्राहिम जादरान द्वारा बोले गए इन शब्दों ने उन अफगानी नागरिकों का दर्द बयां किया जिन्हें पाकिस्तान छोड़ने के लिए 31 अक्टूबर की डेडलाइन दी गई थी.</p>
<p style="text-align: justify;">पाकिस्तानी हुकूमत ने ये डेडलाइन उन 17 लाख अफगानी नागरिकों के लिए दी है जो पाकिस्तान में गैरकानूनी रुप से रहते हैं. ऐसे में यदि डेडलाइन खत्म होने तक ये अफगानी नागरिक अपने देश वापस नहीं लौटे तो इनकी गिरफ्तारी कर इन्हें जबरन अफगानी बॉर्डर पर छोड़ दिया जाएगा. </p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन पाकिस्तान सरकार को ये फैसला लेना क्यों पड़ा और क्या होगा अगर ये अफगानी नागरिक अपने देश वापस नहीं गए तो, चलिए इस स्टोरी में जान लेते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों पाकिस्तानी हुकूमत ने क्यों लिया ये फैसला?</strong><br />पाकिस्तान के प्रभारी केंद्रीय मंत्री सरफराज बुगती की माने तो पाकिस्तान में लगभग 17 लाख अफगान गैर कानूनी तौर पर रह रहे हैं. इन अफगान नागरिकों के पास पाकिस्तान में रहने के कागजात नहीं हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था की मानें तो पाकिस्तान में विभिन्न संस्थाओं से रजिस्टर्ड अफगान नागरिकों की संख्या लगभग 31 लाख है</p>
<p style="text-align: justify;">इसी साल सितंबर में पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने वहां के गृह मंत्रालय के हवाले से ये लिखा था कि इस साल देश में फिदायीन हमलों की तादाद में वृद्धि हुई है. जब ज्यादातर मामलों की जांच हुई तो उसमें ये पाया गया कि इन हमलों में अफगान नागरिक भी शामिल हैं. </p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि सरकार ने अब तक इस बात के पुख्ता सबूत आम लोगों को नहीं दिए हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर हुई एक्शन कमिटी की बैठकों में अफगान नागरिकों की वापसी से संबंधित कई फैसले लिए गए थे. जिनमें से एक फैसला ये था कि पाकिस्तान में गैरकानूनी रूप से रह रहे अफगान नागरिकों को उनके देश वापस भेजा जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;">अफगान नागरिकों को उनके देश वापस भेजने की तारीख 31 अक्टूबर तय की गई. वहीं सरकार ने ये भी तय किया कि यदि ये अफगान नागरिक वापस अपने देश नहीं जाते हैं तो एक नवंबर से फॉरेन एक्ट 1946 के तहत कार्रवाई की जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने क्या कहा?</strong><br />अफगानिस्तान में तालिबान सरकार पाकिस्तान के इस फैसले से नाराज है. देश के प्रभारी सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी नाराजगी व्यक्त की और लिखा है कि अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान से निकालने का फैसला स्वीकार योग्य नहीं है. </p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने पाकिस्तान के इस स्टैंड को भी गलत बताया कि पाकिस्तान में रह रहे अफगानी शरणार्थी गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अफगान नागरिकों की वापसी उनकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अब क्या होगा?</strong><br />इस मामले पर पाकिस्तान सरकार ने ये साफतौर पर कह दिया है कि यदि गैरकानूनी रूप से रह रहे अफगानिस्तान को लोग अपने देश वापस नहीं जाते हैं तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के मुताबिक 1 नवंबर से पाकिस्तान की सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियां अवैध तौर पर रह रहे अफगानियों की पहचान करेगी और उन्हें गिरफ्तार करेगी. </p>
<p style="text-align: justify;">जिसके बाद गिरफ्तार किए गए लोगों को अफगान बॉर्डर पर बने टेम्परेरी कैम्पस में रखा जाएगा और फिर जबरन अफगान सीमा के अंदर भेज दिया जाएगा. इसके अलावा ‘अरब न्यूज’ से हुई बातचीत में पाकिस्तान-अफगान सीमा पर तोरखम बॉर्डर पर तैनात एक अफसर ने कहा है कि ये मजबूर अफगानी पुरुष, महिलाएं और बच्चे अलग-अलग गाड़ियों में पाकिस्तान छोड़ रहे हैं. ऐसा लग रहा है उनके साथ जानवरों की तरह व्यवहार हो रहा है. 30 अक्टूबर को कम से कम 10 हजार लोगों ने सीमा पार किया है और इसके लिए इन लोगों को किसी पासपोर्ट या दस्तावेज की जरूरत नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र क्या कर रहा है?</strong><br />इस आदेश के आने के बाद कई अफगान शरणार्थी रजिस्ट्रेशन के लिए अपने कागजात संयुक्त राष्ट्र की संस्था में जमा करवा रहे हैं, हालांकि अब तक उन्हें किसी भी प्रकार की कार्रवाई का कोई साफ आदेश नहीं दिया जा रहा है. वहीं बीबीसी से हुई बातचीत में पेशावर में रहने वाले शरणार्थियों ने बताया है कि उनके पास सिर्फ टोकन है जो उन्हें यूएनएचसीआर (यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फ़ॉर रिफ़्यूजीज़) ने दिया है, लेकिन उनके पास किसी प्रकार का कोई कार्ड नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसे लेकर यूएनएचसीआर ने भी एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार पिछले चार दशकों से अधिक समय से अफगानी शरणार्थियों को यहां रख रही है और वैश्विक स्तर पर इसे काफी अच्छे रूप में देखा जाता है लेकिन इसमें और अधिक कोशिशों की जरूरत है. इसके अलावा इस बयान में ये भी कहा गया कि शरणार्थियों की वापसी उनकी इच्छा के अनुरूप होनी चाहिए और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र पाकिस्तान सरकार के साथ प्रक्रिया तय कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शरणार्थी लड़कियों के लिए बड़ी परेशानी</strong><br />पाकिस्तान का ये फरमान अफगानी शरणार्थी लड़कियों के लिए बड़ी परेशानी है. दरअसल अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत ने लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह रोक लगा कर रखी है. ऐसे में जो लड़कियां पाकिस्तान में रहकर पढ़ाई कर रही हैं वो अपने देश में जाकर उसे पूरा नहीं कर सकतीं. </p>
<p style="text-align: justify;">वहीं इस पर पाकिस्तानी हुकूमत ने एक और हमला किया है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद, कराची और मुल्क के दूसरे कुछ शहरों में अफगान बच्चों के स्कूलों को बंद कर दिया है. ‘अरब वर्ल्ड’ से हुई बातचीत में एक 14 साल की अफगान बच्ची ने कहा कि जब तक हो सकेगा, मैं पाकिस्तान में रहूंगी. यहां पढ़ाई तो कर सकती हूं. अफगानिस्तान में तो ये मुमकिन ही नहीं. मेरे पिता ने मुझसे कहा है कि अगर पाकिस्तान पुलिस तुम्हें गिरफ्तार भी कर लेती है तो भी तुम पाकिस्तान से मत जाना. यहां तो जिंदगी नर्क हो जाएगी. </p>
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