भारतीय क्रिकेट टीम के नए ग्लेन मैकग्रा अंशुल कंबोज, इंग्लैंड में चल रही टेस्ट सीरीज में मिली डेब्यू कैप

भारतीय क्रिकेट टीम में एक नया चेहरा देखने को मिला है। इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज़ के चौथे मैच में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने अपना टेस्ट डेब्यू किया है। उन्हें आकाशदीप की जगह टीम में शामिल किया गया है। आइए जानते हैं कौन है अंशुल कांबोज और क्यों इनकी तुलना ग्लेन मैकग्रा से हो रही है।

तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज। सोशल मीडिया

भारतीय क्रिकेट टीम में एक नया चेहरा देखने को मिला है। इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज़ के चौथे मैच में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने अपना टेस्ट डेब्यू किया है। उन्हें आकाशदीप की जगह टीम में शामिल किया गया है। आइए जानते हैं कौन है अंशुल कांबोज और क्यों इनकी तुलना ग्लेन मैकग्रा से हो रही है।

बुधवार से भारत और इंग्लैंड के बीच एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी का चौथा टेस्ट शुरू हुआ है। टॉस से ठीक पहले 25 साल के अंशुल कंबोज को डेब्यू कैप दी गई और वो भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 318वें क्रिकेटर बने। अंशुल के कोच सतीश राणा ने बीबीसी को बताया कि शुरुआती दिनों में ट्रेनिंग के दौरान ही उन्हें भरोसा हो गया था कि अंशुल एक दिन टीम इंडिया के लिए ज़रूर खेलेंगे।

हरियाणा के करनाल जिले से रखते हैं ताल्लुक

अंशुल हरियाणा के करनाल ज़िले के फाजिलपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे 11 साल की उम्र से करनाल में सतीश राणा की क्रिकेट एकेडमी में प्रैक्टिस कर रहे हैं। अंशुल के पिता किसान हैं। वे ही पहली बार अपने बेटे को करनाल की इस एकेडमी में लेकर गए थे। ट्रेनिंग के शुरुआती सालों में हर दिन उनके पिता उन्हें एकेडमी लेकर जाया करते थे। हालांकि कुछ सालों के बाद अंशुल खुद ही बस से करनाल आने-जाने लगे।

140 किमी की रफ्तार से गेंदबाज़ी करने की क्षमता

अब अंशुल का परिवार करनाल शिफ्ट हो चुका है, लेकिन आज भी परिवार किराए के मकान में ही रहता है। अंशुल अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत से ही ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज गेंदबाज़ ग्लेन मैकग्रा के फैन रहे हैं। अंशुल को बचपन से ही ‘उनके (मैकग्रा) जैसा’ बनना था। अंशुल लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाज़ी करने की क्षमता रखते हैं। उनका लाइन और लेंग्थ पर कंट्रोल भी बेहतरीन है।

अंशुल की गेंदबाजी देखने के लिए बस थोड़ा इंतजार

डेब्यू पर अंशुल के भाई संयम ने बताया कि मम्मी-पापा बहुत खुश हैं। डेब्यू के बाद जो रिश्तेदार घर पर आए हुए थे, उन्हें मिठाई खिलाई। भारत के पहले बल्लेबाज़ी करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि टेस्ट मैच है। इसलिए अंशुल की गेंदबाजी देखने का थोड़ा तो इंतज़ार करना पड़ेगा। हम चाहते हैं कि इंडिया अच्छा खेले और मैच में जीत हासिल करे।

शुरुआत से अंशुल के प्रेरणास्रोत रहे ग्लेन मैकग्रा

संयम बीकॉम फ़ाइनल ईयर के स्टूडेंट हैं। अंशुल उम्र में उनसे चार साल बड़े हैं। संयम बताते हैं, “शुरुआत में तो अंशुल गांव में ही क्रिकेट खेलते थे और फिर पापा एकेडमी में लेकर गए थे। एकेडमी की फ़ीस पहले ज़्यादा नहीं थी और बाद में सर (सतीश राणा) ने सब कुछ मैनेज किया। अब भी अंशुल उसी एकेडमी में प्रैक्टिस करते हैं। शुरुआत में अंशुल ग्लेन मैकग्रा की गेंदबाज़ी को देखा करते थे।

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गांव के बच्चों के लिए अंशुल हैं आइडियल

अंशुल के पापा क्रिकेट देखते हैं लेकिन उनकी मम्मी की दिलचस्पी क्रिकेट में बहुत ज़्यादा नहीं है। हालाँकि वो अपने बेटे का मैच ज़रूर देखती हैं और अपने बेटे के डेब्यू से काफी खुश हैं। टीम इंडिया में चयन के बाद अंशुल की घर पर क्या बात हुई, इस पर संयम ने कहा, “ज्यादा बात तो नहीं हुई। पापा ने यही पूछा था कि प्रैक्टिस कैसी चल रही है। अंशुल आईपीएल के बाद अपने गांव भी गए थे। उन्हें देखकर गांव में और भी बच्चे अब क्रिकेट की तैयारी करने लगे हैं।

जिम, ग्राउंड और क्रिकेट यही है अंशुल की ज़िंदगी

अंशुल के चाचा यशपाल कंबोज बताते हैं कि अंशुल को क्रिकेट के अलावा कुछ पसंद ही नहीं है। जिम, ग्राउंड और क्रिकेट यही अंशुल की ज़िंदगी है। अंशुल को मैं 10 साल से इन्हीं जगहों पर देख रहा हूं। अंशुल ने हरियाणा के लिए अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 क्रिकेट खेला है। 2020 में अंशुल का चयन अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए भी हुआ था, लेकिन टूर्नामेंट से ठीक पहले चोटिल होने की वजह से वो इसका हिस्सा नहीं बन पाए।

रणजी ट्राफी में 10 विकेट लेकर दिखाया कमाल

अंशुल ने 2023 में विजय हजारे ट्रॉफी में अपनी गेंदबाज़ी से छाप छोड़ी और हरियाणा को विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। अंशुल ने इस ट्रॉफ़ी में 10 मैचों में 17 विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन के साथ आईपीएल में भी उनकी एंट्री हुई। साल 2024 में मुंबई इंडियंस ने अंशुल को 20 लाख रुपये में खरीदा था। पहले सीजन में अंशुल तीन मैचों में दो ही विकेट ले पाए थे। उसी साल रणजी क्रिकेट में अंशुल ने इतिहास रचा। केरल के ख़िलाफ़ रणजी ट्रॉफी मुक़ाबले में उन्होंने 49 रन देकर सभी 10 विकेट हासिल किए।

शुरुआत से ही उसे तेज गेंदबाज बनना था: कोच

सतीश राणा बताते हैं कि शुरुआत से ही अंशुल को तेज़ गेंदबाज़ बनना था। वो ग्लैन मैकग्रा की तरह लाइन और लेंग्थ पर कंट्रोल रख कर गेंदबाज़ी करता था। इसलिए उसकी लाइन और लेंग्थ काफी बेहतर है। अंशुल का गेम को लेकर फोकस रहता था और अब भी उसका वही फोकस है। दिन में आठ से दस घंटे प्रैक्टिस करता था। सुबह मेरे पास एकेडमी में आता था और शाम को जाता था। अच्छा प्लेयर बनने के लिए अंशुल ने दिन-रात मेहनत की है।

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