युवाओं में बढ़ गए हार्ट अटैक के मामले, क्या कोरोना वैक्सीन है जिम्मेदार, आईसीएमआर की स्टडी के हवाले से स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताई सच्चाई

कोविड काल के बाद से अचानक युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में तेजी देखी गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कोरोना रोधी वैक्सीन को अचानक हार्ट अटैक से होने वाली मौतों से जोड़ा था। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपना स्पष्टीकरण दिया है। मंत्रालय से साफ किया कि हार्ट अटैक से हो रहीं मौतों और वैक्सीन के बीच कोई संबंध नहीं है। आईसीएमआर और एम्स के अध्ययनों ने भी इसकी पुष्टि की है। मंत्रालय ने लोगों से सीने में दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने का आग्रह किया है।

प्रतीकात्मक फोटो

कोविड काल के बाद से अचानक युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में तेजी देखी गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कोरोना रोधी वैक्सीन को अचानक हार्ट अटैक से होने वाली मौतों से जोड़ा था। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपना स्पष्टीकरण दिया है। मंत्रालय से साफ किया कि हार्ट अटैक से हो रहीं मौतों और वैक्सीन के बीच कोई संबंध नहीं है। आईसीएमआर और एम्स के अध्ययनों ने भी इसकी पुष्टि की है। मंत्रालय ने लोगों से सीने में दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने का आग्रह किया है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया द्वारा दिल के दौरे से होने वाली मौतों को कोरोना रोधी वैक्सीन से जोड़ने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि कोरोना रोधी वैक्सीन और अचानक मौतों के बीच कोई संबंध नहीं है। आईसीएमआर और एम्स के अध्ययनों ने इस बात को निर्णायक रूप से स्थापित किया है। सिद्दरमैया ने मंगलवार को कहा था कि कोरोना रोधी वैक्सीन को जनता के लिए जल्दबाजी में मंजूरी देना और इन्हें लोगों को लगाया जाना इन मौतों का एक कारण हो सकता है।

सीने में दर्द की समस्याओं को न करें नजरअंदाज

स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से आग्रह किया कि अगर उन्हें सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण हों तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं और इन संकेतों को नजरअंदाज न करें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में कई एजेंसियों के माध्यम से अचानक मौतों के मामले की जांच की गई है। इन अध्ययनों ने निर्णायक रूप से स्थापित किया है कि कोरोना टीकाकरण और अचानक मौतों की रिपोर्ट के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा किए गए अध्ययनों से पुष्टि होती है कि भारत में कोरोना के टीके सुरक्षित और प्रभावी हैं।

टीकों से गंभीर दुष्प्रभावों के बहुत कम मामले सामने

इन टीकों से गंभीर दुष्प्रभावों के बहुत कम मामले सामने आए हैं। अचानक दिल के दौरे से होने वाली मौतें कई कारणों से हो सकती हैं, जिनमें आनुवंशिकी, जीवनशैली, पहले से मौजूद बीमारियां और कोरोना के बाद की जटिलताएं शामिल हैं। आईसीएमआर और एनसीडीसी अचानक होने वाली मौतों के कारणों को समझने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, खासकर 18 से 45 वर्ष की आयु के वयस्कों में।

हार्ट अटैक के खतरों से युवा खुद को कैसे बचाएं

अमेरिकी हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. इवान लेविन के अनुसार, “अगर शुरू से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम किया जाए और तंबाकू से दूरी बनाई जाए, तो हृदय को नुक़सान से बचाया जा सकता है। कोरोना काल के बाद से लोगों की जीवन शैली के बहुत ज्यादा बदलाव आया है। घर से काम कर रहे युवाओं का मूवमेंट थम सा गया है। वह काम करते करते खाना भी खा लेते हैं और वहीं बैठे-बैठे सो भी लेते हैं। कहीं न कहीं यह हृदय से जुड़ी बीमारियों को दावत देने जैसा है।

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