टैक्स भरने में देरी पड़ेगी जेब पर भारी, एक दिन के देरी पर भी देना होगा तीन महीने का ब्याज

वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को आयकर विधेयक 2025 में अग्रिम टैक्स को लेकर एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें अगर तय तारीख तक एडवांस टैक्स की पूरी रकम नहीं भरी जाएगी तो 3% ब्याज देना होगा। यह नियम पुराने आयकर अधिनियम 1961 के साथ मिलाकर बनाया गया है ताकि कोई उलझन न रहे।

वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को आयकर विधेयक 2025 में अग्रिम टैक्स को लेकर एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें अगर तय तारीख तक एडवांस टैक्स की पूरी रकम नहीं भरी जाएगी तो 3% ब्याज देना होगा। यह नियम पुराने आयकर अधिनियम 1961 के साथ मिलाकर बनाया गया है ताकि कोई उलझन न रहे।

वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को आयकर विधेयक, 2025 में अग्रिम टैक्स को लेकर एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक, अगर आप तय तारीख तक एडवांस टैक्स की पूरी रकम नहीं भरते हैं तो अब आपको 3% ब्याज देना होगा। यह नियम पुराने आयकर अधिनियम, 1961 के साथ मिलाकर बनाया गया है, ताकि कोई उलझन न रहे। चलिए समझते हैं कि आखिर यह आपके लिए मायने क्यों रखता है?

क्या कहता है नया नियम?

वर्तमान के नियमों के हिसाब से, अगर आपका टैक्स 10,000 रुपए या उससे ज्यादा है, तो आपको साल में 15 जून, 15 सितम्बर, 15 दिसम्बर और 15 मार्च को चार बार अग्रिम टैक्स जमा करना होता है। अगर आप इन तारीखों तक पूरा टैक्स नहीं भर पाते, तो ब्याज देना पड़ता है। पहले नए आयकर (संख्या 2) विधेयक, 2025 में कहा गया था कि अगर आप तय तारीख के अगले ही दिन बाकी रकम जमा कर देते हैं, तो सिर्फ 1% प्रति माह ब्याज लगेगा। लेकिन यह नियम पुराने कानून से मेल नहीं खा रहा था, जिससे टैक्सपेयर्स को समझने में दिक्कत हो रही थी।
अब नई अधिसूचना ने इसे साफ कर दिया है। चाहे आप एक दिन देर से टैक्स जमा करें, आपको कम से कम ‘3 महीने का 3% ब्याज’ देना होगा। यानी, छोटी-सी चूक भी आपके लिए महंगी साबित हो सकती है।

क्या कहते हैं जानकार?

नांगिया एंडरसन एलएलपी के साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने इस बदलाव के बारे में कहा कि, “पहले का नियम पुराने टैक्स कानून से मेल नहीं खा रहा था। अब इस नई अधिसूचना ने सारी चीजें साफ कर दी हैं। अगर कोई टैक्सपेयर तय तारीख के बाद, चाहे एक दिन बाद ही, बाकी टैक्स जमा करता है, तो उसे कम से कम तीन महीने का ब्याज देना होगा।” इसका मतलब है कि अब टैक्सपेयर्स को पहले से ज्यादा सतर्क रहना होगा, ताकि ब्याज की मार से बचा जा सके।

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क्या है नए विधेयक का मकसद?

सोमवार को लोकसभा में पास हुआ ‘आयकर (संख्या 2) विधेयक, 2025’ 60 साल पुराने ‘आयकर अधिनियम, 1961’ की जगह लेकर जल्द ही कानून बन जाएगा। जिसका सबसे बड़ा लक्ष्य है टैक्स नियमों को आसान करना। इसमें जटिल नियमों और शब्दों को कम करके टैक्स सिस्टम को ऐसा बनाया जा रहा है कि आम आदमी भी इसे आसानी से समझ सके। खास तौर पर, अग्रिम टैक्स और ब्याज से जुड़े नियमों को और स्पष्ट करके टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश की गई है।

टैक्स सिस्टम बनेगा पारदर्शी

यह नया नियम एडवांस टैक्स भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए अहम है। चाहे आप बिजनेस करते हों, नौकरीपेशा हों, या कोई प्रोफेशनल हों, अगर आपका टैक्स ज्यादा है, तो यह नियम आप पर लागू हो सकता है। वित्त मंत्रालय का यह कदम टैक्स सिस्टम को और पारदर्शी बनाने की दिशा में है। पर, साथ ही यह समय पर टैक्स भरने के लिए सख्ती से प्रेरित करता है। अगर आप समय पर टैक्स नहीं भरते, तो 3% ब्याज आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

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