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Israel-Hamas War: इजरायल और हमास के बीच चल रही जंग आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. खासतौर पर उन फलस्तीनी लोगों के लिए जो गाजा में रह रहे हैं. इजरायल ने तो अपने यहां घुसे हमास के लड़ाकों को बाहर खदेड़ दिया है, मगर अब उसने गाजा में घुसकर उनसे बदला लेने का भी ठान लिया है. गाजा में लगातार बम गिराए जा रहे हैं, आलम ये है कि ऐसा लगने लगा है कि जैसे इजरायल और हमास के बीच जंग अभी थमने वाली नहीं है.
इजरायली एयरफोर्स ने बताया कि इसने अब तक गाजा पट्टी पर 6000 बम गिराए हैं. 40 किमी के दायरे में फैला गाजा दुनिया की सबसे सघन आबादी वाली जगह है. ये इलाका 23 लाख लोगों का घर है और यहां हमास अपनी सरकार 2007 से ही चला रहा है. अब तक इजरायली एयरस्ट्राइक में 1900 फलस्तीनी मारे जा चुके हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस इलाके में शांति कब होगी और इजरायल-हमास के बीच कौन से देश मध्यस्थता करवा सकते हैं.
खाड़ी देशों पर मध्यस्थता की जिम्मेदारी
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में मौजूद थिंक टैंक चैथम हाउस के मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका प्रोग्राम की डायरेक्टर सनम वाकील का कहना है कि मध्य पूर्व में इस बात का डर बना हुआ है कि युद्ध की वजह से बाकी देश भी चपेट में आ सकते हैं. उनका कहना है कि खाड़ी देशों को लगता है कि हिंसा से उनकी घरेलू सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है. युद्ध के चलते फलस्तीनी लोग इजरायल छोड़कर पड़ोसी मुल्क जॉर्डन, मिस्र, लेबनान और यहां तक कि ईरान भी जा सकते हैं.
अमेरिका, यूरोपीय देश, रूस और चीन इजरायल-हमास के बीच मध्यस्थता के लिए आगे आए हैं. लेकिन वाकील का कहना है कि इसकी जिम्मेदारी खाड़ी देशों को उठानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन समेत अन्य मुल्कों का कदम महत्वपूर्ण होगा, मगर शांति के लिए अगुवाई खाड़ी देशों को करनी चाहिए. चीन पहले ही सऊदी अरब और ईरान को करीब ला चुका है. ऐसे में वह अब यहां पर भी मदद करना चाहता है. लेकिन हमास संग बात करना थोड़ा कठिन होने वाला है.
खाड़ी के कौन से देश करवा सकते हैं मध्यस्थता?
मध्यस्थता के लिए सबसे पहला नाम मिस्र का आता है, मगर वह थोड़ा अनिच्छुक नजर आ रहा है. मिस्र ने गाजा तक मदद के लिए मानवीय कॉरिडोर बनाने की बात भी कही है. लेकिन मिस्र नहीं चाहता है कि गाजा से लोग उसके यहां आएं. वह गाजा के साथ अपने राफाह क्रॉसिंग को खोलने को इच्छुक भी है, मगर उसे फलस्तीनी शरणार्थियों का डर सता रहा है. मिस्र को हमास से भी खतरा है. हालांकि, इन सबके बाद भी गाजा का पड़ोसी होने के बाद उसे शांति की पहल करनी चाहिए.
दूसरा नाम जॉर्डन का है, जो पहले भी फलस्तीनी लोगों के हक की आवाज उठा चुका है. जॉर्डन और इजरायल के बीच शांति समझौता भी है. लेकिन हमास के साथ उसके ज्यादा संबंध नहीं हैं. जॉर्डन ने दो-देश वाला सुझाव भी दिया है. जॉर्डन के इजरायल के साथ-साथ अमेरिका से भी अच्छे संबंध है. वह फलस्तीनी लोगों का हितैषी भी माना जाता है, क्योंकि उसने हाल ही में गाजा के लिए 4 मिलियन यूरो का दान दिया है. इसलिए वह इजरायल-हमास के बीच मध्यस्थता करवा सकता है.
अगला नंबर कतर का है, जिसके हमास के साथ करीबी रिश्ते हैं. कतर में हमास का ऑफिस भी है. कतर युद्धविराम और इजरायल की जेलों में बंद 36 फलस्तीनी महिलाओं और बच्चों के बदले हमास के जरिए अगवा किए गए लोगों की अदला-बदली पर बातचीत की कोशिश कर रहा है. कतर ने पहले भी इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थता करवाने में मदद की है. वह ईरान और अमेरिका के बीच भी चर्चा करवाने का काम कर चुका है. ऐसे में उस पर भी सबकी निगाहें हैं.
तुर्की को भी ऐसे मुल्क के तौर पर देखा जा रहा है, जो इजरायल-हमास के बीच मध्यस्थता करवा सकता है. हमास के ऑफिस भी तुर्की में हैं. वह फलस्तीनी नेताओं के साथ भी चर्चा के लिए उन्हें इंस्ताबुल बुलाता रहता है. तुर्की ने इस हफ्ते हमास और इजरायल के बीच मध्यस्थता करवाने का ऑफर भी दिया. तुर्की और इजरायल के बीच रिश्ते भी सुधर गए हैं. यही वजह है कि तुर्की वो संभावित देश हो सकता है, जो गाजा को शांति की ओर लेकर जाए.
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