भारत को फाइनल मुकाबले के लिए खड़ा कर भावुक हुईं जेमिमा, बस ट्राफी पर टिकीं आंखें

Jemimah Rodrigues: विश्व कप महिला क्रिकेट के दूसरे सेमीफाइनल में भारतीय टीम की ओर से जेमिमा रॉड्रिक्स ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम को फाइनल में पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही। जीत के बाद जेमिमा भावुक हो गईं। यहां तक कि उन्हें छलकती आंखों के साथ अपना पुरस्कार ग्रहण किया।

सेमीफाइनल में भारतीय टीम की जीत के बाद भावुक हुईं जेमिमा रोड्रिक्स। सोशल मीडिया

Jemimah Rodrigues: विश्व कप महिला क्रिकेट के दूसरे सेमीफाइनल में भारतीय टीम की ओर से जेमिमा रॉड्रिक्स ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम को फाइनल में पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही। जीत के बाद जेमिमा भावुक हो गईं। यहां तक कि उन्हें छलकती आंखों के साथ अपना पुरस्कार ग्रहण किया।

Jemimah Rodrigues: भारतीय महिला टीम की अनुभवी बल्लेबाज जेमिमा रॉड्रिग्ज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत को जीत दिलाने के बाद भावुक हो गईं और अपने आंसू नहीं रोक सकीं। जेमिमा के दम पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पांच विकेट से हराकर महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। जेमिमा सेमीफाइनल में शतक लगाकर नाबाद लौटीं और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। अब रविवार को भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा।

ऑस्ट्रेलिया को पांच विकेट से हराया

ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.5 ओवर 338 रन बनाए थे। जवाब में भारत के लिए जेमिमा ने शतक लगाया और कप्तान हरमनप्रीत के साथ तीसरे विकेट के लिए 167 रनों की साझेदारी की जिससे भारत ने 48.3 ओवर में पांच विकेट पर 341 रन बनाकर मैच अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया की टीम इस टूर्नामेंट में अजेय बनी हुई थी, लेकिन भारतीय टीम ने एलीस हीली की टीम का विजयी अभियान रोक दिया। जेमिमा 134 गेंदों पर 14 चौकों की मदद से 127 रन बनाकर नाबाद रहीं।

सपने जैसी लग रही है यह जीत- जेमिमा

जेमिमा ने मैच के बाद कहा, सबसे पहले मैं यीशु को धन्यवाद देना चाहती हूं क्योंकि मैं यह अपने दम पर नहीं कर सकती थी। मुझे पता है कि आज उन्होंने मुझे आगे बढ़ाया। मैं अपनी मां, अपने पापा, अपने कोच और हर उस इंसान को धन्यवाद देना चाहती हूं जिसने इस पूरे समय मुझ पर विश्वास किया। पिछले चार महीने वाकई बहुत मुश्किल थे, लेकिन अभी भी यह सपने जैसा लग रहा है और हकीकत में उतरा नहीं है।

आप खुद अपनी किस्मत बनाते हैं’

शतक बनाने को लेकर जेमिमा ने कहा, आज मेरा अर्धशतक या शतक लगाने का जश्न मनाने का दिन नहीं था, बल्कि आज भारत को जीत दिलाने का दिन था। मुझे पता है कि मुझे कुछ मौके मिले, लेकिन मुझे लगता है कि ईश्वर ने सब कुछ सही समय पर दिया है और उन्होंने इसे सही इरादे और शुद्ध मन से बढ़ाया है। मुझे लगता है कि अब तक जो कुछ भी हुआ वह सिर्फ इसी के लिए तैयार करने के लिए हुआ था। आप खुद अपनी किस्मत बनाते हैं।

तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने पर क्या बोलीं जेमिमा?

जेमिमा से जब तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, मैंने वाकई नंबर 3 पर बल्लेबाजी नहीं की थी। जब चर्चा हो रही थी, मैंने बस इतना कहा कि मुझे बता देना तो मैदान में प्रवेश करने से ठीक पहले मुझे पता चला कि मैं नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने जा रही हूं। लेकिन मैंने इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा। यह खुद को साबित करने के लिए नहीं था। यह सिर्फ भारत के लिए यह मैच जीतने के लिए था, क्योंकि हम हमेशा कुछ खास परिस्थितियों में हार जाते थे।

पिछली बार विश्व कप टीम में नहीं मिली थी जगह

जेमिमा ने कहा, पिछली बार मुझे विश्व कप टीम से ड्रॉप कर दिया गया था। इस बार मैं टीम में आई और सोचा कि कोशिश करती हूं। मैं अच्छी फॉर्म में थी, लेकिन एक के बाद एक चीजें होती रहीं और मैं कुछ भी नियंत्रित नहीं कर पाई। मेरे आसपास ऐसे शानदार लोग थे जो मुझ पर विश्वास करते थे। इस पूरे दौरे में मैं लगभग हर दिन रोई हूं। मानसिक रूप से मैं ठीक नहीं थी। फिर ड्रॉप होना मेरे लिए एक चुनौती थी, लेकिन मुझे लगता है कि मुझे बस उपस्थित रहना था और ईश्वर ने सब संभाल लिया।

ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रही थीं जेमिमा

भारतीय बल्लेबाज ने कहा, शुरुआत में मैं बस ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रही थी और खुद से बातें कर रही थी। लेकिन आखिर में मैं बस बाइबल का एक वचन दोहरा रही थी क्योंकि मेरी ऊर्जा खत्म हो गई थी, मैं बहुत थक गई थी। मैं एक वचन दोहरा रही थी जिसमें कहा गया है, बस शांत खड़ी रहो और ईश्वर तुम्हारे लिए लड़ेंगे। मैं बस खड़ी रही और उन्होंने मेरे लिए लड़ाई लड़ी।

जीत के बाद भावनाएं नहीं रोक सकीं

जीत के बाद भावुक होने पर जेमिमा ने कहा, मुझे लगता है कि मेरे पास कुछ बचा ही नहीं था। यह वाकई बहुत मुश्किल था लेकिन मैंने मैच खत्म होने तक शांत रहने की कोशिश की और आखिर में यह देखकर कि आखिरकार भारत ने मैच जीत लिया है, मैं खुद को रोक नहीं पाई।

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सभी खिलाड़ियों के साथ की बातचीत’

हरमनप्रीत के साथ साझेदारी पर उन्होंने कहा, जब हरमन दी आईं, तो हमने सिर्फ एक साझेदारी की बात की। हमने कहा कि रन आ रहे हैं। लेकिन आखिर में सच कहूं तो मुझे दिक्क्त हो रही थी। ऋचा मुझसे लगातार बात कर रही थीं। दीप्ति, सब मुझसे बात कर रहे थे और हौसला दे रहे थे। फिर अमनजोत ने मुझे प्रेरित करना शुरू किया। मैं बहुत धन्य हूं कि जब मेरा हौसला टूटने लगता है तब मेरी साथी खिलाड़ी मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। मैं इसका कोई श्रेय नहीं ले सकती।

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