महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने हिन्दी की अनिवार्यता पर की बयानबाजी, बोले- ‘स्कूलों में केवल मराठी अनिवार्य, हिंदी नहीं…’,

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने कहा है कि राज्य में केवल मराठी भाषा अनिवार्य है, हिंदी नहीं। स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का विवाद अतार्किक है। कक्षा 6 से 8 तक हिंदी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है, अब यह एक वैकल्पिक विषय है। शेलार ने जोर दिया कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है और छात्रों के हितों को ध्यान में रखा गया है।

महाराष्ट प्रांत में सांस्कृितक मामलों के मंत्री आशीष सेलार की फाइल फोटो।

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने कहा है कि राज्य में केवल मराठी भाषा अनिवार्य है, हिंदी नहीं। स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का विवाद अतार्किक है। कक्षा 6 से 8 तक हिंदी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है, अब यह एक वैकल्पिक विषय है। शेलार ने जोर दिया कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है और छात्रों के हितों को ध्यान में रखा गया है।

भाषा को लेकर कई राज्यों में छिड़ा है विवाद

कई राज्यों में भाषा को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि राज्य में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य है, हिंदी नहीं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में तीसरी भाषा पढ़ाने को लेकर चल रहा विवाद पूरी तरीके से अतार्किक है। दरअसल, मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए आशीष शेलार ने कहा कि महाराष्ट्र में कक्षा एक से पांच तक हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाना शुरू नहीं किया गया है।

कक्षा 6 से 8 तक हिंदी की अनिवार्यता समाप्त

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि कक्षा 6 से 8 तक हिंदी पढ़ाने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। इसके बजाय हमने हिंदी को भी अन्य भाषा के जैसे वैकल्पिक रखा है। उन्होंने दावा कि करते हुए कहा कि इस विषय पर चल रही कोई भी चर्चा पूरी तरीके से अतार्किक और अनुचित है। उन्होंने आगे कहा कि हम मराठी भाषा के कट्टर समर्थक हैं और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस भाषा को आवश्यक रखा है।

राज्य सरकार ने जारी किया था नया आदेश

बता दें कि राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते ही एक संशोधित आदेश पारित किया है। इस आदेश में कहा गया कि हिंदू को सामान्य रूप से कक्षा एक से पांच मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। राज्य में हिंदी को लेकर चल रही टिप्पणी के बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में गलतफहमी से उतपन्न आलोचना स्वीकार्य है। कुछ लोग विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं, जो उनका अधिकार है।

भाजपा हमेशा से छात्र कल्याण की प्रबल समर्थक

उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से मराठी और छात्र कल्याण की प्रबल समर्थक है। महाराष्ट्र में केवल मराठी को अनिवार्य बनाया गया है। कोई अन्य भाषा किसी पर नहीं थोपी गई है। पहले कक्षा पांच से आठ तक हिंदी अनिवार्य थी, अब इस अनिवार्यता को भी हटा लिया गया है।