Devastation in Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में मानसून ने भारी तबाही मचाई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 20 जून 2024 से अब तक बारिश और सड़क दुर्घटनाओं में 409 लोगों की जान जा चुकी है। बारिश से संबंधित घटनाओं में 229 लोगों की मौत हुई है जबकि 180 सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए।
Devastation in Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश विनाशकारी मानसून की मार झेल रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने पुष्टि की है कि 20 जून, 2025 से अब तक बारिश से संबंधित आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं के कारण 409 लोगों की जान जा चुकी है।
सड़क दुर्घटनाओं में 180 लोग मारे गए
राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 229 मौतें सीधे तौर पर भूस्खलन, अचानक बाढ़, बादल फटने, डूबने, बिजली का झटका लगने और घर गिरने जैसी बारिश से संबंधित घटनाओं से जुड़ी थीं। इसके अलावा, लगातार बारिश के दौरान फिसलन भरे रास्तों, भूस्खलन से हुई रुकावटों और कम दृश्यता के कारण हुई सड़क दुर्घटनाओं में 180 लोग मारे गए।
अब तक 473 लोग हुए घायल
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने विभिन्न जिलों में 473 लोगों के घायल होने और 41 के लापता होने की भी सूचना दी है। यह तबाही केवल मानव जीवन तक ही सीमित नहीं रही है। 2,100 से ज्यादा जानवर मारे गए, जबकि 26,955 मुर्गियां खो गईं। बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर, राज्य ने भारी नुकसान की सूचना दी है। 5,164 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं और 2,743 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
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सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को सर्वाधिक नुकसान
सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 8,896 सड़कें, 6,147 जलापूर्ति योजनाएँ और 87 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। राज्य ने 4,50,444.91 लाख रुपये (4,500 करोड़ रुपये से अधिक) के संचयी आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया है। 899 दुकानें, 2,001 गौशालाएं और 4,297 मज़दूरों की झोपड़ियां भी बर्बाद हो गईं।
सबसे ज्यादा मंडी में हुईं मौतें
ज़िलों के हिसाब से, मंडी में सबसे ज़्यादा 37 बारिश से संबंधित मौतें दर्ज की गईं, उसके बाद चंबा (28), कुल्लू (31), कांगड़ा (34) और शिमला (23) का स्थान रहा। सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक प्रभावित जिले मंडी और शिमला (24-24), सोलन (24), और चंबा और कांगड़ा (22-22) रहे।
नाज़ुक पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा
एसडीएमए ने ज़ोर देकर कहा है कि कुछ क्षेत्रों में आसमान साफ़ होने के बावजूद, नाज़ुक पहाड़ी ढलानों पर पानी भर जाने के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़ और घरों के ढहने का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों के निवासियों से सतर्क रहने और सुरक्षा सलाह का पालन करने का आग्रह किया है।
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