
ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा के बाद रविवार तड़के भगदड़ में तीन लोगों की मौत और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों में 6 की हालत गंभीर बनी हुई है। मामले में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पुरी के डीएम और एसपी का ट्रांसफर कर दिया। वहीं दो अधिकारी को निलंबित किया है। साथ ही मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।
गुंडिचा मंदिर के सामने हुआ हादसा
हादसा जगन्नाथ मंदिर से करीब 3 किमी दूर गुंडिचा मंदिर के सामने हुआ। यहां भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ के दर्शन करने के लिए भारी भीड़ जुटी थी, इसी दौरान भगदड़ मची। सीएम मोहन चरण माझी ने घटना पर माफी मांगी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि मैं और मेरी सरकार भगवान जगन्नाथ के सभी भक्तों से व्यक्तिगत रूप से क्षमा मांगते हैं। यह लापरवाही माफ करने लायक नहीं है। इसके बाद राज्य सरकार ने पुरी के डीएम और एसपी का तबादला कर दिया। चंचल राणा को नया डीएम और पिनाक मिश्रा को एसपी बनाया है। डीसीपी और कमांडेंट को निलंबित कर दिया गया है।

रथ बाद में पहुंचा और भगवान के दर्शन को लगी भीड़
पुरी की रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों को उनकी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर के सामने 9 दिन के लिए खड़ा कर दिया जाता है। यहां बलभद्र और सुभद्रा के रथ पहले पहुंच चुके थे। जगन्नाथ रथ बाद में पहुंचा, जिससे लोगों में उसके दर्शन करने की होड़ लग गई। इसी दौरान भगदड़ मची, जिसमें गिरने से कई लोग कुचल गए। बताया जा रहा है कि घटना के समय वहां पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था। हादसे में मारे गए लोगों के नाम बसंती साहू (36), प्रेमकांति महांति (78) और प्रभाती दास हैं। इनके शव पुरी मेडिकल कॉलेज में रखे गए हैं।
शुक्रवार को भी भीड़ के दबाव में 625 हुए थे बीमार
इससे पहले शुक्रवार (27 जून) को देवी सुभद्रा के रथ के आसपास भीड़ का दबाव बढ़ने से 625 से ज्यादा श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई थी। प्रशासन के मुताबिक 70 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया था। इनमें से 9 की हालत गंभीर बताई जा रही है।
रविवार को पूरी हुई जगन्नाथ रथयात्रा
पुरी में शुक्रवार (27 जून) को शाम 4 बजे भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू हुई थी। सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ खींचा गया। इसके बाद सुभद्रा और जगन्नाथ के रथ खींचे गए। पहले दिन बलभद्र का रथ 200 मीटर तक खींचा गया, सुभद्रा-भगवान जगन्नाथ के रथ भी कुछ दूरी तक खींचे गए। शनिवार को 10 बजे फिर रथयात्रा शुरू हुई। भक्तों ने तीनों रथों को खींचना शुरू किया। सुबह 11.20 बजे भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज और दोपहर 12.20 बजे देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और इनके बाद भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ 1.11 बजे गुंडिचा मंदिर पहुंचा।
रथयात्रा में पहले भी ही चुके हादसे, कई ने गंवाई जान
2024 की भगदड़ में दो की मौत, कई घायल
2024 में जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन 7-8 जुलाई को किया गया था। रथयात्रा के पहले दिन 7 जुलाई को 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पंहुचे थे, इस वजह से भगदड़ की स्थिति बन गई। भगदड़ के दौरान घबराहट की वजह से 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल भी हुए।
2008 में हुई भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत
2008 में जगन्नाथ यात्रा का आयोजन 4-5 जुलाई को किया गया था। यात्रा के पहले दिन 4 जुलाई को भगवान जगन्नाथ मंदिर के बाहर सिंहद्वार के सामने भगदड़ मच गई, जिसमें 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मरने वालों में 3 महिलाएं भी शामिल थीं। यह हादसा उस समय हुआ जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथयात्रा के लिए मंदिर से बाहर लाया जा रहा था।











