
cash at home case: भ्रष्टाचार के मामले में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। आरोप है कि उनके आवास में आग लगने के बाद जले हुए नोटों के बंडल बरामद हुए थे।
cash at home case: न्यायपालिका में जवाबदेही एवं पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी। उनके खिलाफ जांच के लिए 146 सांसदों ने जांच कराने का प्रस्ताव दिया था।इसी आधार पर संसद में महाभियोग प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई होगी। संभवत: शीत सत्र में महाभियोग की प्रक्रिया पूरी होगी। तब तक प्रस्ताव लंबित रहेगा।
सदन में जमकर हुआ हंगामा
स्पीकर जब जस्टिस वर्मा पर महाभियोग लाने की प्रक्रिया की घोषणा कर रहे थे, तब सदन में पूरी तरह शांति थी। अन्य दिनों की तरह विपक्षी सदस्य हंगामा नहीं कर रहे थे। मगर कुछ देर बाद ही विपक्ष ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। जिसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
न्यायपालिका की गरिमा पर उठे थे सवाल
स्पीकर ने लोकसभा में बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विभिन्न दलों के सांसदों ने जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव 31 जुलाई को दिया था। जस्टिस वर्मा पर आरोप है कि दिल्ली स्थित उनके आवास में इसी वर्ष 15 मार्च को आग लगने के बाद जले हुए नोटों के बंडल बरामद हुए थे। इस घटना ने न्यायपालिका की गरिमा एवं ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मामला संविधान के तहत कार्रवाई के योग्य
घटना के बाद अब तक मिले साक्ष्यों का हवाला देते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मामला संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत कार्रवाई के योग्य है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर विचार के बाद शिकायत को गंभीर माना है और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने इसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी भेजी है।
सीजेआई की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा दोषी
उल्लेखनीय है कि भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ‘इन-हाउस प्रक्रिया’ के तहत तीन सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसने चार मई को अपनी रिपोर्ट सीजेआई को सौंपी। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी पाया गया था, जिसके आधार पर सीजेआई ने उन्हें इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने का विकल्प दिया। वर्मा ने इस्तीफा देने से इन्कार कर दिया था।
इन्हें मिली जांच की जिम्मेवारी
जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी. आचार्य को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हैं जस्टिस अरविंद कुमार
जस्टिस अरविंद कुमार ने 1987 में वकालत शुरू की थी। वह 2009 में कर्नाटक हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने थे। 2021 में गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं 2023 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए। जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव अभी मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। इसके पहले वह राजस्थान के भी मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। उनका संबंध छत्तीसगढ़ से है। बीवी आचार्य वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। पांच बार कर्नाटक के महाधिवक्ता रह चुके हैं।
सत्यवार्ता से अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए वॉट्सएप चैनल को ज्वाइन करें https://whatsapp.com/channel/0029VaB40FS2ZjCiiziPWL02











