
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन पूरा करके इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से लौट आए हैं। स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल प्रशांत महासागर में उतरा गया। आखिर क्यों? क्या जमीन पर लैंडिंग हो सकती थी खतरनाक? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।
एक्सिओम-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला के साथ कमांडर पैगी व्हिट्सन, मिशन एक्सपर्ट पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी शामिल हैं। ये ड्रैगन ‘ग्रेस’अंतिरक्ष यान भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 4:45 बजे अंतरिक्ष स्टेशन से अलग हो गया था। मंगलवार को स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल शाम करीब तीन बजे सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में उतरा।
बोइंग का स्टारलाइनर जमीन पर हुआ था लैंड
वहीं 2024 में इसी तरह के दूसरे मिशन में बोइंग का स्टारलाइनर मैक्सिको की जमीन पर लैंड किया गया था। 1984 में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा सोवियत सैल्यूट 7 अंतरिक्ष स्टेशन के अपने मिशन के बाद सोयूज टी-10 कैप्सूल कजाकिस्तान की धरती पर उतरा था। समझते हैं कि आखिर समुद्र और जमीन पर स्प्लैशडाउन कराने में क्या अंतर होता है?
रुस व अमेरिका के यानों की लैंडिंग में बड़ा अंतर
रूस और अमेरिका के यानों की लैंडिंग में महत्वपूर्ण अंतर होता है। अमेरिका के यानों को समुद्र में लैंड कराया जाता है, जबकि रूस और चीन के यानों को धरती पर लैंड कराया जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका, रूस और चीन के यानों के डिजाइन में काफी बड़ा अंतर होता है। स्पेसक्राफ्ट की डिजाइन, उसकी क्षमता और रिकवरी की सुविधा के हिसाब से यह पहले ही तय कर लिया जाता है कि यान को कहां पर लैंड कराया जाना है।

क्या जमीन पर लैंडिंग अधिक खतरनाक?
पानी में लैंडिंग कराने को लेकर एक सुरक्षा कारण भी होता है, क्योंकि जब कोई स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वातावरण में आता है तो इसकी ऊंचाई उस वक्त 120 से 130 किलोमीटर होती है और रफ्तार 27,359 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। ऐसी स्थिति में जमीन पर वर्टिकल लैंडिंग करवाने का इतना समय नहीं होता है कि स्पीड को कंट्रोल किया जा सके और सेफ लैंडिंग हो सके।
हालांकि जमीन पर लैंडिंग करवाने के लिए वर्टिकल लैंडिंग सिस्टम और लैंडिंग लेग्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद सुरक्षित लैंडिंग नहीं हुई तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। AXIOM-4 मिशन में स्प्लैशडाउन के वक्त स्पेसक्राफ्ट की स्पीड को 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक कंट्रोल कर दिया गया था।
जमीन पर लैंडिंग से कचरा फैलने का खतरा
जमीन पर लैंडिंग न कराने का एक कारण यह भी होता है कि स्पेसक्राफ्ट के ट्रंक से मलबा फिर से महासागर में फेंक दिया जाए। इससे जमीन पर किसी व्यक्ति या संपत्ति का जोखिम काफी कम हो जाता है। स्टारलाइनर के न्यू मैक्सिको लैंडिंग में देखा गया था कि मलबा काफी दूर तक बिखर गया था। समुद्र में लैंडिंग कई मामलों में सुरक्षित होती है, लेकिन प्रशांत महासागर में खराब मौसम, समुद्री लहरें और यान की रिकवरी प्रक्रिया में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री ने दी शुभांशु को बधाई
शुभांशु शुक्ला की सफल लैंडिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई भारतीय नेताओं ने बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा, ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा से वापस लौट रहे शुभांशु शुक्ला का मैं पूरे देश के साथ स्वागत करता हूं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में, उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन – गगनयान – की दिशा में एक और मील का पत्थर है।
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