Sarva Pitru Amavasya 2023: कब है सर्व पितृ अमावस्या? उस दिन ऐसे पितरों का होगा श्राद्ध, जानें सही तिथि, श्राद्ध समय और महत्व

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हाइलाइट्स

आश्विन कृष्ण अमावस्या की तिथि 13 अक्टूबर को रात 09 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होने वाली है.
सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों के श्राद्ध का समय सुबह 11 बजकर 44 मिनट से है.
इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या 14 अक्टूबर शनिवार को है.

हर साल सर्व पितृ अमावस्या आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. इसे आश्विन अमावस्या और महालया अमावस्या भी कहते हैं. पितृ पक्ष में सर्व पितृ अमावस्या की तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण होती है क्यों​कि उस दिन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि किया जाता है. इस साल सर्व पितृ अमावस्या कब है? सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध का समय क्या है? इसकी सही तिथि और महत्व क्या है? इन सभी के बारे में विस्तार से बता रहे हैं श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी.

सर्व पितृ अमावस्या कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन कृष्ण अमावस्या की तिथि 13 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रात 09 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होने वाली है और इस तिथि की समाप्ति 14 अक्टूबर दिन शनिवार को रात 11 बजकर 24 मिनट पर होगी. उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या 14 अक्टूबर शनिवार को है. यह शनि अमावस्या भी है.

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सर्व पितृ अमावस्या 2023 पर श्राद्ध का समय क्या है?
14 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों के श्राद्ध का समय सुबह 11 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ है, जो दोपहर 03 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इसमें कुतुप मूहूर्त, रौहिण मूहूर्त और अपराह्न काल तीनों शामिल हैं. सर्व पितृ अमावस्या पर कुतुप मूहूर्त 46 मिनट, रौहिण मूहूर्त 46 मिनट और अपराह्न काल 02 घंटा 18 मिनट का होगा.

कुतुप मूहूर्त: 11:44 एएम से 12:30 पीएम तक
रौहिण मूहूर्त: 12:30 पीएम से 13:16 पीएम तक
अपराह्न काल: 13:16 पीएम से 15:35 पीएम तक

सर्व पितृ अमावस्या का महत्व क्या है?
पितृ पक्ष की 16 ति​थियों में सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन आप सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण आदि कर सकते हैं. आपको अपने जिन पितरों के बारे में मालूम न हो और जिन पितरों के निधन की तिथि मालूम न हो तो आप सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन सभी के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोज, पंचबलि कर्म, श्राद्ध आदि कर सकते हैं. इसमें माता पितरों का भी श्राद्ध हो सकता है. हालांकि नवमी ​श्राद्ध तिथि पर सभी माता पितरों का श्राद्ध किया जाता है.

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इंद्र योग और हस्त नक्षत्र में सर्व पितृ अमावस्या
सर्व पितृ अमावस्या के दिन इंद्र योग प्रात:काल से प्रारंभ होकर सुबह 10:25 बजे तक है, उसके बाद से वैधृति योग प्रारंभ है. हस्त नक्षत्र प्रात:काल से शुरू होकर शाम 04 बजकर 24 मिनट तक है और उसके बाद से चित्रा नक्षत्र है.

सर्व पितृ अमावस्या पर स्नान-दान
सर्व पितृ अमावस्या पर आप सुबह में स्नान करें. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद अपने पितरों को जल, तिल और सफेद फूल से तर्पण दें. तर्पण के समय कुशा की पवित्री धारण करें. उसके बाद पितरों को तृप्त करने के लिए सफेद वस्त्र, चावल, फल, धन आदि का दान करें. उसके बाद दक्षिणा अवश्य दें. दक्षिणा में कोई पात्र यानि बर्तन देना चाहिए.

Tags: Dharma Aastha, Pitru Paksha

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