
Jaishankar’s visit to Russia: विदेश मंत्री एस जयशंकर 21 अगस्त तक रूस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अमेरिकी टैरिफ बढ़ोत्तरी के बाद भारतीय विदेश मंत्री का यह दौरा खासा महत्वपूर्ण है। भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसकी युद्ध मदद करने के अमेरिकी आरोप के जवाब में एस जयशंकर ने रूसी मीडिया से कहा कि भारत को रूसी तेल खरीदने के बारे में धमकी देना हैरान करने वाला है।
Jaishankar’s visit to Russia: विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के दौरे पर हैं। हाल ही में अमेरिका के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद उनका यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण है। इस बढ़ोत्तरी पर अमेरिका ने अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया है कि वो रूस से कच्चे तेल खरीदता है। भारत रूस से तेल खरीद कर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उसकी मदद कर रहा है। इस अमेरिकी फरमान पर भारत ने नाराजगी जाहिर की है।
तेल खरीदने में हम नहीं हैं चीन हैं नम्बर एक
रूसी मीडिया से बात करते हुए जयशकंर ने कहा, रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार भारत नहीं, चीन है। इसके अलावा, एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार भारत नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ है। हम वह देश नहीं हैं जिसका 2022 के बाद रूस के साथ व्यापार में सबसे बड़ा उछाल आएगा। मुझे लगता है कि दक्षिण में कुछ देश हैं। हम एक ऐसा देश हैं, जहां पिछले कुछ वर्षों से अमेरिकी कहते रहे हैं कि हमें विश्व ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए सब कुछ करना चाहिए, जिसमें रूस से तेल खरीदना भी शामिल है। संयोग से, हम अमेरिका से भी तेल ख़रीदते हैं, और यह मात्रा बढ़ी है। इसलिए ईमानदारी से कहूं तो, हम उस तर्क के तर्क से बहुत हैरान हैं, जिसका मीडिया ने ज़िक्र किया था।’
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ट्रंप का है दोहरा चरित्र
एक ओर ट्रंप रूस से तेल खरीदने के लिए भारत के खिलाफ कार्रवाई की, दूसरी तरफ कुछ दिनों पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करते हुए उन्होंने कहा था कि अमेरिका और रूस के बीच व्यापार बढ़ता जा रहा है। यकीनन ट्रंप का यह व्यवहार उनके दोहरे चरित्र को दर्शाता है।
इसलिए बढ़ाया शुल्क
संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क लगाया है, जबकि रूसी तेल की खरीद के चलते 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जिसके परिणामस्वरूप कुल 50 प्रतिशत शुल्क हो गया है। ऐसा करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर रूस से तेल खरीदना बंद करने का दबाव बना रहे थे। उनका दावा था कि इससे यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिला। जबकि भारत इसे रूस से तेल खरीद का बचाव करते हुए इसे संप्रभु कारकों, जैसे बाजार की स्थिति, उपलब्धता और अपने राष्ट्रीय हित से प्रेरित कदम बताया है।
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