वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सीजेआई ने तीन प्रावधानों पर लगाई रोक, जानिए क्या दिए आदेश

Waqf Amendment Act: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ की कुछ धाराओं पर आंशिक रोक लगाई है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने प्रत्येक धारा को दी गई प्रथम दृष्टया चुनौती पर विचार किया है।

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया।

Waqf Amendment Act: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ की कुछ धाराओं पर आंशिक रोक लगाई है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने प्रत्येक धारा को दी गई प्रथम दृष्टया चुनौती पर विचार किया है।

Waqf Amendment Act:वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ की कुछ धाराओं पर आंशिक रोक लगाई है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने प्रत्येक धारा को दी गई प्रथम दृष्टया चुनौती पर विचार किया है। हमने पाया है कि कानून के संपूर्ण प्रावधानों पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं बनता। कुछ धाराओं को संरक्षण की आवश्यकता है।

तीन मुद्दों पर लगाई अंतरिम रोक

  • वक्फ यूजर डिनोटिफिकशन पर रोक
  • कलेक्टर की शक्ति पर रोक
  • गैर-मुस्लिमों को शामिल करने पर रोक

वक्फ बोर्ड में तीन से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम यह भी मानते हैं कि वक्फ बोर्ड में 3 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए और कुल मिलाकर 4 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए। इस मामले में सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने अपना फैसला सुनाया। सीजेआई ने कहा कि हमने बहस सुनी थी कि क्या पूरे संशोधन अधिनियम पर रोक लगाई जाए या नहीं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने माना है कि पूर्वधारणा हमेशा क़ानून की संवैधानिकता के पक्ष में होती है, हस्तक्षेप केवल दुर्लभतम मामलों में ही किया जाता है।

वक्फ प्रावधानों पर रोक लगाने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के उस प्रावधान पर रोक लगा दी है जिसके तहत वक्फ बनाने के लिए किसी व्यक्ति को 5 साल तक इस्लाम का अनुयायी होना ज़रूरी था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा जब तक यह तय करने के लिए नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के सभी प्रावधानों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट का कहना है कि कुछ धाराओं को संरक्षण की ज़रूरत है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले वकील

एडवोकेट अनस तनवीर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार पाया है कि कुछ प्रावधानों पर रोक लगाने का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। उन्होंने सभी प्रावधानों या पूरे अधिनियम पर रोक नहीं लगाई है लेकिन कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई है। जहां तक गैर-मुस्लिम सदस्यों का सवाल है, अदालत ने कहा है कि वक्फ बोर्ड में, यह 3 से अधिक नहीं हो सकता और धारा 9 में 4 से अधिक नहीं हो सकता है और पंजीकरण पर, अदालत ने स्पष्ट रूप से समय सीमा बढ़ा दी है, लेकिन प्रावधान पर रोक नहीं लगाई है।

अब तक क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की गई 15 सितंबर की वाद सूची के अनुसार, अदालत इस मामले में अपना आदेश सुनाएगी। अंतरिम आदेश सुरक्षित रखने से पहले, पीठ ने संशोधित वक्फ कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के वकीलों और केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें लगातार तीन दिनों तक सुनी थीं। पीठ ने पहले उन तीन मुद्दों की पहचान की थी, जिन पर याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम आदेश के जरिये रोक लगाने का अनुरोध किया था।

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ये हैं तीन मुद्दे

अधिसूचना रद्द करने के मुद्दे के अलावा, याचिकाकर्ताओं ने राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना पर भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि बोर्ड और परिषद में केवल मुसलमानों को ही शामिल किया जाना चाहिए। तीसरा मुद्दा उस प्रावधान से संबंधित है, जिसके अनुसार, जब कलेक्टर यह पता लगाने के लिए जांच करता है कि संपत्ति सरकारी है या नहीं, तो वक्फ संपत्ति को वक्फ नहीं माना जाएगा।

केंद्र सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को पांच अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचित किया था। लोकसभा ने इस विधेयक को तीन अप्रैल को 288 सदस्यों के समर्थन से पारित कर दिया, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। राज्यसभा ने चार अप्रैल को इस विधेयक को पारित किया। राज्यसभा में इसके पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 सदस्यों ने मतदान किया।

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